संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। नवरात्र के पावन पर्व का पांचवां दिन सोमवार मां स्कंदमाता की आराधना को समर्पित रहा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। शहर के बड़ी माता मंदिर सहित अन्य मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। नवरात्र के दिनों में जागरण के साथ हवन किए जा रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं, इसी कारण उनका यह नाम पड़ा। वे अपने गोद में बाल रूप में कार्तिकेय को धारण किए रहती हैं और सिंह पर सवार होती हैं। उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें कमल पुष्प और बाल कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। इस स्वरूप की पूजा करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है।
काली माता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तजन माता के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना करते नजर आए। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया और भक्ति का माहौल बना रहा। महिलाएं और युवतियां व्रत रखकर मां की भक्ति में लीन दिखीं। इस दिन मां स्कंदमाता को विशेष भोग अर्पित किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केले का भोग मां को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसके अलावा केसरिया खीर और बेसन के लड्डू भी चढ़ाए गए। काली माता मंदिर के पुजारी महंत रमन पुरी ने बताया कि मां स्कंदमाता की पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन की परेशानियां दूर होकर परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में हवन, भंडारे का आयोजन
कलायत। श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में सोमवार रात्रि आयोजित होने वाले भगवती जागरण से पूर्व हवन यज्ञ व भंडारे का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में आयोजित हवन में श्रद्धालुओं ने आहुति डालकर सुख-समृद्धि की कामना की। हवन के बाद सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही। आयोजकों ने बताया कि जागरण में सुरभि निष्काम सेवा जागरण मंडल व विभिन्न कलाकारों द्वारा मां भगवती का गुणगान किया जाएगा। इसके साथ ही आकर्षक झांकियां भी प्रस्तुत की जाएंगी। संवाद
कैथल के बड़ी माता मंदिर में की गई सजावट।