कलायत। मंडी में मजदूरों की हड़ताल से उठान कार्य प्रभावित हो गया है। मजदूरों का कहना है कि कम मजदूरी और उचित सुविधाएं नहीं मिलने पर उन्होंने हड़ताल का निर्णय लिया है। मजदूरों का आरोप है कि उन्हे मजदूरी के नाम पर 100 रुपये प्रति दिन ही पड़ रहे हैं। इसके अलावा कलायत की मंडी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
मजदूर यूनियन के प्रधान कुलदीप ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या अनाज मंडी में निर्धारित स्थानों पर धान न डालने की है। पूरी रात मंडी में किसान अपने धान की ट्रॉली लेकर आते हैं और जहां स्थान मिलता है वहीं डाल देते हैं। इसलिए मजदूरों को धान के उठान के लिए काफी दूर तक घूम कर ट्रक तक जाना पड़ता है। मजदूर पूरे दिन में एक ट्रक की भी उठान नहीं कर पाते। कई मजदूर तो मजदूरी कम मिलने के कारण पलायन भी कर गए। उन्होंने बताया कि इस बारे में उन्होंने दोनों मंडी प्रधानों व सचिव के सामने मजदूरों की समस्या रखी थी। प्रधानों से आश्वासन भी दिया था कि पांच बजे के बाद मंडी में ट्रॉलियों की एंट्री बंद करवा दी जाएगी ताकि मजदूर खरीदे गए माल का उठान आराम से कर सकें। आश्वासन के बावजूद स्थिति ठीक होने की बजाय बदतर हो गई।
प्रवासी मजदूर रामखिलावन, सही राम आदी ने कहा कि कलायत मंडी में न तो पीने के लिए पानी है और न ही सुलभ शौचालय। अनाज मंडी में करीब पांच हजार मजदूर, किसान व व्यापारी हैं। केवल दो ही सुलभ शौचालय हैं जिनमें अधिकतर महिला मजदूरों का आवागमन अधिक रहता है। पुरुष मजदूरों के सामने बड़ी समस्या है। पीने के लिए दो वाटर कूलर लगाए हुए हैं पर वे चल नहीं रहे। मजदूर नहाने व पीने के लिए पानी नहर से लेकर आ जाते थे और अब नहर भी बंद ही पड़ी है। ऐसे में मजदूर करें तो क्या करें। सुनवाई न होने पर मजदूरों ने हड़ताल का निर्णय लिया है। मंडी प्रधानों ने मजदूरों को एक बार फिर से आश्वासन दिया कि न तो रविवार को मंडी में कोई किसान अपनी फसल लेकर आएगा व हर रोज सांय पांच बजे के बाद से मंडी में किसान की ट्रॉली को नहीं आने दिया जाएगा। इससे मजदूरों को माल की लिफ्टिंग करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। मंडी प्रधानों के आश्वासन के बाद से अनाज मंडी से खरीदे गए धान के उठान का कार्य बाद दोपहर शुरू हो गया।