संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। फरल गांव में जर्जर हो चुकी लगभग 47 वर्ष पुरानी पीने के पानी की टंकी गिराने का काम शुरू हो गया है। हालांकि अभी इसे गिराने में एक महीने से भी ज्यादा का समय लगेगा, क्योंकि आबादी में होने के कारण इसे एकदम नहीं गिराया जा सकता।
गौरतलब है कि इस टंकी की जर्जर हालत को देखते हुए इसके गिरने का खतरा बना हुआ था और कई परिवार डर के साये में जी रहे थे। ग्रामीणों को खतरा था कि एक समय गांव फरल के लोगों की प्यास बुझाने वाली पानी की टंकी अब कहीं ग्रामीणों की जान की प्यासी न बन जाए। आए दिन टंकी से गिर रहे मलबे से स्थानीय लोग व खासकर छोटे बच्चे खौफ के साए में जीने को विवश थे। यह पानी की टंकी पिछले कई वर्षों से बंद पड़ी है।
टंकी का इस्तेमाल न होने के कारण इसकी हालत बिगड़ती गर्ई। चूंकि अब गांव फरल में लगभग सात ट्यूबवेल काम कर रहे हैं इसलिए यह काम की नहीं रही थी। इस टंकी के पास काफी घर बने हुए हैं। स्थानीय लोगोंं संदीप सिंह, सुखबीर सिंह, ईश्वर सिंह, जसवीर सिंह, गुरमहेंद्र सिंंह, कुलदीप सिंह, मामचंद ने बताया कि उन्होंने कई बार इसकी शिकायत संबंधित विभाग को की और अब जाकर उन्होंने इस बार इसे हटवाने का काम शुरू करवाया है। टंकी गिराने का काम शुरू हो जाने के बाद अब उन्होंने राहत की सांस ली है।
जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ जगदीश ने बताया कि हलके में गांव फरल, टीक और ढांड में इस तरह की पानी की टंकी है, जिन्हें गिराने का ठेका दे दिया गया है। जल्द ही ये सभी टंकी गिरवा दी जाएगी, ताकि कोई हादसा न हो।
1977 में हुआ था निर्माण
ग्रामीणों ने बताया कि फरल में पेयजल आपूर्ति के लिए वर्ष 1977 के आस पास लगभग 125 फीट ऊंची इस पानी की टंकी का निर्माण हुआ था। उस समय में गांव फरल के लोगों के लिए पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्रोत थी।