संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। विश्व चिंतन दिवस पर वीरवार को गीता भवन के समीप स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें स्कूल की शिक्षिकाओं ने महिलाओं के अधिकारों और कर्तव्यों को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी तो होनी चाहिए।
महिलाओं ने कहा कि इसके साथ में यह भी पता होना चाहिए कि अपने परिवार, समाज और देश के प्रति उनके कर्तव्य क्या हैं। यह तभी संभव हो पाएगा, जब महिलाएं संबंधित विषयों पर चिंतन-मनन करेंगी। अपनी व अपने परिवार की दिनचर्या तय कर उसी के अनुरूप कार्य करेंगी।
कर्तव्यों का बोध होना जरूरी
शिक्षिका सुनीता गुलाटी ने कहा कि महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति तो जागरूक हैं ही, इसके साथ-साथ उन्हें अपने कर्तव्यों का बोध होना भी जरूरी है। उन्हें बहुत अधिक चिंतन करने की जरूरत है। हमारे बच्चे सभ्यता और संस्कृति में पिछड़ते जा रहे हैं। महिलाओं की बड़ी जिम्मेदारी है कि बच्चों को सभ्यता और संस्कृति के अनुसरण के लिए प्रेरित करें।
अलग-अलग निभाती हैं भूमिकाएं
अंजू छाबड़ा ने कहा कि महिला के मां, गुरु, बेटी व अन्य कई रूप हैं। महिलाओं को अलग-अलग भूमिका निभाते हुए अपने बच्चों को सभ्यता और संस्कृति से जोडऩे का प्रयास करना चाहिए।
पुरुष के समान हर क्षेत्र में भागीदार
सुमन तंवर ने कहा कि आज महिला हर क्षेत्र में पुरुष के समान भागीदार है। महिलाएं अपने जीवन को सरल बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारियां तो निभाएं ही, साथ में चिंतन करें कि परिवार को कैसे जोड़े रखें और स्वस्थ रखें।
चिंतन करना महत्वपूर्ण
निधि ने कहा कि चिंतन करना सबके लिए महत्वपूर्ण है। महिलाओं की दिनचर्या के साथ ही उनका चिंतन शुरू हो जाता है। महिलाएं पूरे दिन के लिए योजना तैयार करें और उस पर चिंतन-मनन करके परिवार और समाज के कल्याण का कार्य करें।
उत्थान के करें प्रयास
शशिकांता ने कहा कि चिंतन दिवस लॉर्ड बेडन पावेल और उनकी पत्नी लेडी आवेल पावेल का जन्मदिन है, जिन्होंने स्काउटिंग की मुहिम चलाई। वे एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने विश्व को शांति से जोडऩे का कार्य किया। उन्होंने महिलाओं के लिए विशेष मुहिम चलाई ताकि महिलाएं अपना उत्थान कर सकें। सबको ऐसे प्रयास करने चाहिए।
बच्चों को दें संस्कार
ज्योति ने कहा कि महिला अपने बच्चों को संस्कार दें। महिला पुरुषों के समान मजबूत हैं, जरूरत है तो चिंतन करने की। महिला के लिए जरूरी है कि वह हर क्षेत्र में मजबूत बने और समाज का भला करे।
महिलाओं को चिंतन की जरूरत
कुलविंद्र कौर ने कहा कि औरत अपराजिता है, लेकिन ग्रामीण तबके में अब भी स्थिति ऐसी है कि महिला पराजित के समान है। ऐसे में महिलाओं को चिंतन की जरूरत है। उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों का पूरा ज्ञान होना चाहिए।