राजौंद। माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की लूट के खिलाफ महिलाओं ने मोर्चा खोलते हुए नाराजगी जताई। ब्याज की ऊंची दर, मनमानी किश्तें और धमकियों के खिलाफ जनवादी महिला समिति ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा
जनवादी महिला समिति की जिला अध्यक्ष सावित्री ने कहा कि प्रदेश में महंगाई और बेरोज़गारी चरम पर हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि महिला और पुरुष दोनों की कमाई से भी घर का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा, कमरतोड़ मेहनत के बावजूद खाना-पीना, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और शादी जैसे खर्च जुटाना मुश्किल हो गया है। नतीजतन, किसान, खेत मजदूर और मजदूर कर्ज़ों के बोझ तले दबे हुए हैं।
सावित्री ने बताया कि बिना गारंटी के सरकारी बैंकों से कर्ज मिलना कठिन है। इसके चलते बड़ी संख्या में महिलाएं माइक्रोफाइनेंस कंपनियों और प्राइवेट बैंकों के जाल में फंस रही हैं। ये कंपनियां महिलाओं से मनमाना ब्याज वसूल रही हैं। घर आकर धमकाती हैं और कई बार सामान तक जब्त कर लेती हैं। शर्मिला पिलखन, जिला कोषाध्यक्ष, ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद इन कंपनियों को लूट की खुली छुट दे दी गई है। सावित्री और शर्मिला पिलखन ने चेताया कि यदि सरकार ठोस कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। संवाद