कैथल। महिला समानता दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को आरकेएसडी कॉलेज में अमर उजाला का अपराजिता कार्यक्रम हुआ। समाजशास्त्र और अंग्रेजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए आयोजन में शिक्षकों ने महिला समानता और सशक्तिकरण विषय पर व्याख्यान दिया। कहा कि महिलाओं का मानसिक, शारीरिक व आर्थिक रूप से मजबूत होना महिला ही सशक्तिकरण है।
यदि महिलाएं सशक्त होंगी तो ही उन्हें सही मायने में समानता और अधिकार मिल जाएंगे। इस दौरान विद्यार्थियों ने शिक्षकों से सवाल भी किए, जिनके जवाब दिया गया।
अंग्रेजी विभाग से प्रो. डॉ. गीता गोयल ने कहा कि पहले की अपेक्षा अब महिलाओं के प्रति समाज की सोच में काफी बदलाव आए हैं, लेकिन कई मौकों पर उन्हें पुरुषों के समान नहीं देखा जा रहा। समाज को मानसिकता बदलने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं का हर तरह से मजबूत होना सशक्तिकरण है। समाज महिला और पुरुष दोनों से मिलकर बनता है। काफी समय पहले तक हमारे समाज में काफी प्रथाएं प्रचलित थी, जो महिला और पुरुषों में असमानता को प्रदर्शित करती थी।
समाजशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ. अशोक अत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण तभी होगा, जब उनको परिवार व समाज का पूरा सहयोग मिलेगा। महिलाएं हर क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करने में सक्षम हैं, लेकिन उनमें आगे बढऩे की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। एक सशक्त महिला केवल एक नहीं बल्कि दो परिवारों के साथ-साथ समाज का भला कर सकती है। एक सशक्त और निर्णय लेने की क्षमता रखने वाली महिला किसी बड़े पद पर आसीन होकर या राजनीति के क्षेत्र में आकर समाज ओर देश के विकास में अपना योगदान दे सकती है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि आज परिवार और समाज के सहयोग से महिलाएं पुरुषों के समान देश के हित में कार्य कर रही हैं।
इस दौरान मौके पर मौजूद छात्रा प्रियंका, ममता, छात्र कोमित व अमित ने शिक्षकों से महिला समानता और सशक्तिकरण विषय पर सवाल किए। विद्यार्थियों ने कहा कि आज भी समाज में कई जगह महिलाओं को समान अवसर नहीं मिलते। लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलाने की बजाय परिवार बेटों को शिक्षित करने में ज्यादा रुचि लेते हैं।
उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कार्य के लिए बाहर जाए तो उन्हें रोका जाता है और ग्रामीण क्षेत्र में तो बिना अनुमति घर के बाहर तक नहीं निकल सकती हैं। इस पर शिक्षकों ने बताया कि समाज की इस मानसिकता में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। आज बड़े अधिकारियों से लेकर राजनेताओं में महिलाओं का नाम प्रमुखता से आता है। महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर मिल रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी मंजिल पाने के लिए प्रयास शुरू करने की आवश्यकता है।