संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाते हुए अब जंगली जानवरों से फसल को होने वाले नुकसान को भी बीमा कवरेज में शामिल कर लिया है। इससे जिले के तमाम किसानों को भी लाभ होगा। दरअसल, गुहला समेत जिले के कई गांवों के किसान जंगली पशुओं की समस्याओं से दशकों से जूझ रहे हैं। उन्हें अभी तक फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाता था।
अब अतिवृष्टि, बाढ़ या जलभराव की तरह ही किसान जंगली जानवरों से हुए नुकसान का भी मुआवजा क्लेम कर सकेंगे। इससे जिले के सैकड़ों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी फसलें हर साल नीलगाय, जंगली सुअर, हिरण और बंदरों के कारण भारी नुकसान झेलती हैं। खरीफ-2026 से यह कवर ऐड-ऑन विकल्प के रूप में उपलब्ध होगा और इसे स्थानीय जोखिम श्रेणी में रखा गया है।
गुलहा में करीब 35 किलोमीटर के क्षेत्र में जंगल फैला हुआ है. जंगली जानवरों की वजह से यहां खेती करना बुहत मुश्किल माना जाता है। जंगल से लगती जमीन पर किसान जब फसल उगाते हैं तो अंकुरित होने के बाद बंदर, जंगली सूअर, नील गाय उस फसल को तहस-नहस कर देती हैं। इस जंगल की सीमा कुरुक्षेत्र की जमीन से लगती है।
इसी प्रकार बदपुरा, खेड़ी गुलाम अली, फर्शमाजरा, उम्मेदपुर, सीवन, नौच, कक्यौर, मटौर, संयौसर आदि गांवों में भी हर साल जंगली जानवरों के आतंक से सबसे अधिक प्रभावित रहते हैं। कई बार तो इन गांवों में 50 प्रतिशत तक फसल भी नहीं बच पाती।
नई व्यवस्था के तहत किसान को फसल को हुए नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के जरिए देना होगी। किस जानवर से हुए नुकसान का दावा किया जा सकता है, यह सूची संबंधित राज्य सरकारें जारी करेंगी। राज्य पिछले वर्षों के नुकसान के आंकड़ों का विश्लेषण कर संवेदनशील जिलों और बीमा इकाइयों की पहचान भी करेंगे।
इस संदर्भ में स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से जंगलों के आसपास सुरक्षा जाल लगाने की मांग की जा रही थी, लेकिन समाधान नहीं मिला। जंगली जानवर खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा देते थे, जिससे किसानों को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ती थी। अब योजना के विस्तार से किसानों में राहत की भावना है।