कैथल। ज्योतिषाचार्य व संगीत अध्यापक श्याम सुंदर गौड़ ने रविवार को श्रद्धालुओं को नवरात्र पर्व का महत्व बताया। श्याम सुंदर गौड़ ने कहा कि नवरात्र चैत्र और आश्विन मास में दो बार आते हैं। देवी के नौं रूपों की आराधना की जाती हैं। जहां-जहां पर शक्ति के अंग गिरे थे, वहीं पर ही 51 पीठ बने। श्रद्धालु मंदिरों में जाते है। दर्शन करके कृतार्थ हो जाते हैं। मां भगवती मनोकामना पूर्ण करती है। राक्षसों की ओर से पीडि़त देवताओं की रक्षा मां शक्ति देवी ने ही की थी ।
ब्रह्मा, विष्णु व महेश ने अपनी शक्ति देकर भगवती को अधिक सशक्त बनाय। ऐसा हिंदू ग्रंथों में वर्णन मिलता है। देवी भागवत पुराण में काफी मां के विषय में प्रकाश ड़ाला गया है। शुंभ, र्निशुभ, रक्तबीज, महिषासुर, आदि राक्षसों को संहार किया था। अलग-अलग रूपों में शैलपुत्री, ब्रह्म चारिणी, चन्द्रघ्न्टा, कूष्माणा, स्कन्द माता, कात्यानी, कालरात्री, महागौरी,और सिद्धि दात्री, नारायणी , भद्रकाली, मांतगी, कराली, पार्वती, ऊमा, वाराही, चामुण्ड़ा, लक्ष्मी, काली, देवमाता, मंगला, शिवघातृ विजया, कौमरी, मघुकैटभ संहारी। धन धान्य,सुत , जया देने वाली। कामख्या, बाला सुंदरी, ज्वाला, पर्वतवासिनी, सिंह वाहिनी, मां मनसा, मां चंडी, विंध्यवासिनी आदि अनेक नामों से यह जानी व पूजी जाती हैं। देवी, देवता श्रद्धा भावना के भूखे हैं। नवरात्र से हमें जहां भक्ति, शक्ति, आस्था प्राप्त होती है, वहीं हमें काफी शिक्षा भी मिलती है। देवी शक्ति का अवतार मानी गयी है। हमें अशक्तों, निर्बलों, असहायों की रक्षा करनी चाहिए। उन्हें भूल कर भी सताना नहीं चाहिए। नारी जाति का स मान करें, अपमान कदापि नहीं।