गुहला-चीका (कैथल)। पिछले 10 दिनों से लाखों लोगों की सांसें थाम देने वाली घग्गर नदी अब धीरे-धीरे शांत हो रही है। पानी कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन जिन खेतों में एक सप्ताह से पानी भरा हुआ था, वहां खड़ी धान की फसल पूरी तरह चौपट हो चुकी है। असली नुकसान का अंदाजा गिरदावरी के बाद ही सामने आएगा। पानी उतरने के बाद अब बर्बादी के निशान साफ दिखाई देने लगे हैं।
किसान मनजीत सिंह (रत्ता खेड़ा), गुरप्रीत (कौड़ा), महिंद्र सिंह, बलजीत (सिहाली), दलीप सिंह, चरणजीत (मोहनपुर) और हरबंस (मोहनपुर) ने बताया कि बीते दस दिनों में घग्गर का पानी लगभग 40 गांवों को बुरी तरह प्रभावित कर गया। उनके अनुसार, गुहला क्षेत्र की करीब 12 हजार एकड़ धान की फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों को झेलनी पड़ रही है, जिन्होंने ठेके पर जमीन लेकर खेती की थी और अब पूरे परिवार का गुजारा संकट में है।
किसानों ने बताया कि धान की फसल के साथ-साथ खेतों में जमा किया गया पशुओं का सुखा और हरा चारा तथा सब्जियों की फसल भी बर्बाद हो गई। धान की फसल पककर तैयार थी और सितंबर के अंतिम सप्ताह में कटाई होनी थी, लेकिन देर से हुई बरसात और बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया। किसानों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें कम से कम 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।
गौरतलब है कि चंडीगढ़ के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों—कालका, नाहन, बद्दी आदि का बरसाती पानी मारकंडा, घग्गर और टांगरी नदियों से होकर मैदानी इलाकों में पहुंचता है। ये तीनों नदियां गुहला के गांव सिंह के पास मिलकर घग्गर का रूप लेती हैं और गुहला-चीका के बाद पंजाब के पटियाला, संगरूर, हरियाणा के फतेहाबाद, सिरसा होते हुए राजस्थान तक नुकसान पहुंचाती हैं।