32 कैथल। स्व. लाला हंसराज गर्ग। परिजन
कैथल। मेरे दादाजी स्वर्गीय हंसराज गर्ग ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेते हुए दो बार जेल की यातनाएं झेली थीं। जिस मकान में वे रहते थे, मैं आज भी उसी घर में रह रहा हूं। उन्हेें नज्म पढ़ने के लिए अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया था।
दादाजी का ‘अपराध’ केवल इतना था कि वे आजादी के आंदोलन में सक्रिय थे। इंकलाब जिंदाबाद और भारत माता की जय के नारों के साथ वे हर सभा में जोश भरते थे। यही कारण था कि उन्हें दो बार जेल भेजा गया।
स्व. हंसराज गर्ग का जन्म वर्ष 1906 में कैथल में हुआ। 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने पूर्ण स्वतंत्रता का एलान किया और 30 जनवरी 1930 को देशभर में पहली बार ‘आजादी दिवस’ मनाया गया। कैथल में भी इस अवसर पर लोग एकत्र हुए, जहां दादाजी ने स्वतंत्रता के पक्ष में जोशीली क्रांतिकारी नज्म सुनाई।
इसकी शिकायत अंग्रेज प्रशासन तक पहुंची और तुरंत उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें एक सप्ताह के लिए मुल्तान जेल भेज दिया, जहां उन्होंने यातनाएं सही लेकिन हौसला नहीं खोया।
– प्रस्तुति : वेद प्रकाश गर्ग, निवासी- चंदाना गेट, कैथल