पाई। धान के बाद अब गेहूं की फसल में भी उत्पादन कम होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसका असर जमीन के ठेके (लीज) के भाव पर पड़ने की संभावना है। किसानों का मानना है कि इस बार नुकसान के कारण ठेके के रेट में गिरावट आ सकती है।
किसान महावीर, रामकुमार और बलवान ने बताया कि कई किसानों के पास अपनी जमीन नहीं है। इसलिए वे ठेके पर जमीन लेकर खेती करते हैं। पिछले कुछ वर्षों से ठेके के भाव लगातार बढ़ रहे थे और बीते वर्ष यह 70 हजार से 80 हजार रुपये प्रति एकड़ से भी अधिक पहुंच गया था।
उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में धान की उत्पादन काफी कम रही जिससे किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया। इसके बावजूद किसानों ने उम्मीद के साथ गेहूं की बुवाई की थी कि अच्छी पैदावार से उन्हें कुछ राहत मिलेगी। शुरुआत में खेतों में फसल भी अच्छी दिखाई दे रही थी लेकिन अप्रैल के शुरुआती दिनों में हुई बारिश ने पूरी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
किसानों के अनुसार, उन्हें प्रति एकड़ 60 मन से अधिक उत्पादन की उम्मीद थी लेकिन बारिश के कारण पैदावार घटकर 30 से 40 मन प्रति एकड़ ही रह गई। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
किसानों का कहना है कि इस स्थिति में जो लोग अपनी जमीन ठेके पर देते हैं, उन्हें भी पहले जैसी ऊंची कीमत मिलने की संभावना कम है। कुल मिलाकर फसल नुकसान का असर अब खेती के पूरे ढांचे पर पड़ता दिखाई दे रहा है।