संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। चीका अनाज मंडी में गेहूं उठान के किराए को लेकर बीते सीजन से चला आ रहा विवाद अब प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को एसडीएम कैप्टन प्रमेश सिंह ने दोनों पक्षों को बुलाकर अपने कार्यालय में बैठक की और विस्तार से उनकी बात सुनी।
मंडी प्रधान कर्मचंद गर्ग ने बताया कि गेहूं सीजन के दौरान ठेकेदार समय पर उठान नहीं कर पा रहा था, जिससे मंडी में लाखों क्विंटल गेहूं जमा हो गया था। किसानों को गेहूं डालने के लिए जगह नहीं मिल रही थी। यह शिकायत सरकार तक पहुंची, जिसके बाद 29 अप्रैल को मंडी एसोसिएशन के नाम ठेका छोड़ा गया।
उन्होंने कहा कि इसके बाद से उठान प्रक्रिया सुचारु हो गई और मंडी में किसी प्रकार की समस्या नहीं आई। कर्मचंद ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता पूर्व में तीन बार मंडी प्रधान पद का चुनाव हार चुका है और अब वह निजी रंजिश के चलते बेबुनियाद आरोप लगा रहा है।
उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल के बाद उठान के एवज में आढ़तियों को चेक से भुगतान किया जा चुका है। कर्मचंद ने बताया कि एसडीएम ने भी यह स्पष्ट किया कि मंडी एसोसिएशन एक चुनी हुई संस्था है और आढ़ती उसे अपने लाभ का हिस्सा देने के लिए बाध्य नहीं हैं।
विरोधी पक्ष का आरोप: किया गया था पूरा किराया देने का वादा ः शिकायतकर्ता रुलदू राम ने दावा किया कि एसोसिएशन पदाधिकारियों ने आढ़तियों से यह सहमति बनाई थी कि वे अपने वाहनों से उठान करवा लें और सरकार से मिलने वाला पूरा किराया उन्हें दे दिया जाएगा।
रुलदू राम के अनुसार, सरकार की ओर से लोकल गोदाम तक 6.93 रुपये प्रति कट्टा और शोगुलपुर-पलंथी तक 10.44 रुपये प्रति कट्टा किराया निर्धारित किया गया था, लेकिन एसोसिएशन द्वारा आढ़तियों को मात्र 2.50 रुपये से 3 रुपये प्रति कट्टा का ही भुगतान किया गया।
आरोप लगाया कि 50 लाख रुपये तक का अतिरिक्त लाभ एसोसिएशन को हुआ है, जो असल में आढ़तियों का हक है। एसडीएम ने दोनों पक्षों को सुना, और समीक्षा जारी है। अगली कार्रवाई प्रशासन की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।