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Kaithal News: रूस जाकर पहनी वर्दी... डोनबास बॉर्डर पर थम गई गीतिक की सांसें

Sat, 21 Mar 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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25 रूसी सेना में डोनबास बॉर्डर पर डयूटी के दाैरान कैथल के रोहेड़ा गांव का गीतिक शर्मा परिजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना देखने वाला रोहेड़ा गांव का 22 वर्षीय गीतिक शर्मा आखिरकार वर्दी तो पहन सका, लेकिन वह भारत की नहीं, रूस की सेना की थी। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान डोनबास बॉर्डर पर हुई भीषण गोलीबारी में उसकी मौत हो गई। पांच माह तक लापता रहने के बाद जब उसका शव गांव पहुंचा तो हर आंख नम थी और हर जुबान पर एक ही सवाल—क्या यही अंत होना था उस सपने का, जो देश सेवा के लिए शुरू हुआ था।

गीतिक भारत में अग्निवीर भर्ती में दो बार चयन से चूक गया था। फिर वर्ष 2024 में वह रूस चला गया। वहां शुरुआत में कार पेंटर के रूप में काम किया, लेकिन बाद में अपनी इच्छा से रूसी सेना में भर्ती हो गया। उसके पिता ने इस फैसले का विरोध किया, लेकिन गीतिक अपने इरादे पर अडिग रहा। उसने एक बार अपनी कमाई में से करीब दो लाख रुपये घर भेजे, जिन्हें पिता ने यह कहकर लौटा दिया कि उन्हें पैसे नहीं, बेटे की सलामती चाहिए।
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युद्ध के दौरान हुए हमले में गीतिक की मौत हो गई थी, लेकिन शुरुआती जानकारी में उसे लापता बताया गया। बाद में रूसी सेना ने डीएनए जांच के जरिए उसकी पहचान की पुष्टि की। इसके लिए भारत से उसके पिता का डीएनए सैंपल भेजा गया था। मिलान के बाद करीब 10 दिन पहले परिवार को उसकी मौत की आधिकारिक सूचना दी गई।

गीतिक के पिता अमित कुमार करीब एक एकड़ जमीन पर खेती करते हैं और ज्योतिष का कार्य भी करते हैं। उनका छोटा बेटा कोहिनूर अभी पढ़ाई कर रहा है। परिवार पहले से ही सदमे में था—गीतिक की मां का पहले ही निधन हो चुका है, जबकि परिवार के अन्य सदस्य भी हाल की घटनाओं से उबर ही रहे थे कि यह दुखद खबर आ गई।

रोहेड़ा में गीतिक को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। करीब 200 मोटरसाइकिलों और 60 चारपहिया वाहनों के काफिले के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। भारत माता की जय के नारों के बीच अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों का कहना था कि एक एकड़ जमीन पर खेती करने वाले पिता अमित कुमार के लिए सदमा असहनीय है।
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पिता बोले- मां पहले ही गई, बेटे का चेहरा भी न देख सके

सबसे भावुक क्षण तब आया, जब गीतिक का शव गांव पहुंचा। लंबे समय बीत जाने के कारण पिता अपने बेटे का चेहरा भी नहीं देख सके। मां पहले ही इस दुनिया से जा चुकी थीं, ऐसे में बेटे के अंतिम दर्शन न कर पाना परिवार के लिए असहनीय पीड़ा बन गया।

25 रूसी सेना में डोनबास बॉर्डर पर डयूटी के दाैरान कैथल के रोहेड़ा गांव का गीतिक शर्मा परिजन

25 रूसी सेना में डोनबास बॉर्डर पर डयूटी के दाैरान कैथल के रोहेड़ा गांव का गीतिक शर्मा परिजन

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