संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। खाद के बैग का वजन घटाने पर किसानों में रोष है। खाद का प्रति एक बैग पांच किलो वजन घटकर बाजार में आने लगा है। पहले खाद का प्रति बैग 50 किलो का होता था, जो अब 45 किलो का आने लगा है।
नाराज किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने प्रति बैग में से खाद तो कम कर दिया, लेकिन रुपये पूरे 50 किलो खाद के किसानों से वसूले जा रहे हैं। 50 व 45 किलो के बैग के पैसे 266 ही लिए जा रहे हैं, यदि खाद कम हुआ है तो उसके पैसे भी उसकी के अनुसार कम होने चाहिए।
किसानों ने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे में किसान की आय कैसे दोगुनी होगी। इससे तो किसानों को नुकसान हो रहा है। किसानों को प्रति बैग 60 रुपये का नुकसान है। किसानों का आरोप है कि 50 किलो वजन के बैग में पहले 46 प्रतिशत नाइट्रोजन की मात्रा होती थी, जो अब 45 किलो के बैग में नौ प्रतिशत घटकर 37 प्रतिशत नाइट्रोजन आने लगी है।
किसानों का आरोप है कि ऐसा करके सरकार खाद डीलरों का कमीशन बढ़ाने का काम कर रही है और किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है। किसानों का कहना है कि यूरिया खाद का बैग पूरे 50 किलो का मिलना चाहिए, ताकि किसानों का काम आसान हो जाए।
खाद कम करके किसानों की आय कैसे होगी दोगुनी ः किसान नरेंद्र माघो माजरी ने कहा कि सरकार एक तरफ तो आय दोगुनी करने की बात कर रही है। दूसरी तरफ जो किसानों को शुरू से मिल रहा है, वह भी सरकार किसानों से कसौटा जा रहा है। ऐसे में किसानों की आय कैसे दोगुनी की उम्मीद की जा सकती है। सरकार ने पहले खाद पांच किलो से घटाकर 45 किलो किया, अब उसमें से भी पांच किलो घटाकर 40 कर दिया। ऐसे करने स नाराज किसान सरकार की इस नीति का पुरजोर विरोध करेंगे।
खाद का घटाया वजन तो दाम भी कम करे सरकार
किसान मंजीत करोड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने यूरिया खाद के बैग का वजन 50 किलो से घटाकर 45 कर दिया है। किसानों से 45 किलो खाद के भी 266 रुपये वसूले जाते हैं और 45 किलो के भी 270 रुपये लिये जा रहे है। किसानों को प्रति बैग 59 रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है। सरकार को चाहिए कि बैग से खाद कम हुआ है, तो उसके दाम भी कम करे।
खाद में किसानों को झेलना पड़ रहा आर्थिक नुकसान
किसान महाबीर चहल नरड़ ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार किसान विरोधी रही है। खाद के बैग से वजन कम करके भी पूंजीपतियों को भी लाभ पहुंचाया जा रहा है। खाद का दाम 50 किलो का ही किसानों से वसूला जा रहा है और खाद 45 किलो दिया जा रहा है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि वह खाद के दाम भी कम करे।