संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। इस बार वसंत पंचमी के दिन विवाह के लिए कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं बन रहा है। ऐसे में इस वर्ष वसंत पंचमी पर शादी की शहनाइयां नहीं बजेंगी।
वसंत पंचमी पर्व ज्ञान, कला, संगीत और विद्या की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है और मान्यता है कि वसंत पंचमी पर नए कार्य की शुरुआत करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
परंपरागत रूप से इस दिन विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य करना शुभ माना जाता रहा है। इस वर्ष वसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
वसंत पंचमी की तिथि : पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी तिथि का आरंभ 22 जनवरी, गुरुवार को रात 2 बजकर 29 मिनट से होगा और इसका समापन 23 जनवरी, शुक्रवार को रात 1 बजकर 47 मिनट पर होगा। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को ही मनाया जाएगा और इसी दिन मां सरस्वती की पूजा की जाएगी।
वसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त : वसंत पंचमी के दिन शिक्षा आरंभ के लिए सुबह 8 बजकर 33 मिनट से लेकर 11 बजकर 13 मिनट तक का समय अत्यंत शुभ रहेगा। वहीं सरस्वती पूजा के लिए सुबह 7 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक का समय श्रेष्ठ माना गया है।
मीन राशि में रहेगा चंद्रमा ः पं. विशाल
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि धर्मशास्त्रों के अनुसार जब शुक्र या गुरु अस्त अवस्था में होते हैं, तब विवाह सहित किसी भी बड़े मांगलिक कार्य को करना शुभ नहीं माना जाता। इस वर्ष वसंत पंचमी के दिन चंद्रमा मीन राशि में रहेगा और उसके साथ पूर्व भाद्रपद नक्षत्र व परिघ योग का संयोग बन रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की यह स्थिति विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी गई है। इसी कारण इस बार वसंत पंचमी पर विवाह और गृह प्रवेश जैसे कार्य स्थगित रहेंगे। उन्होंने बताया कि आमतौर पर वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त मानकर पूरे देश में मांगलिक कार्य किए जाते रहे हैं, लेकिन इस वर्ष ग्रहों की स्थिति अलग होने के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाएगा।
गजकेसरी योग का शुभ संयोग ः पं. संजय
पंडित संजय शास्त्री ने बताया कि 23 जनवरी, शुक्रवार को वसंत पंचमी के दिन चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होगा। उन्होंने बताया कि चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के स्थित होने से गजकेसरी योग का शुभ संयोग बन रहा है। गुरु को ज्ञान का कारक ग्रह माना जाता है और गुरु की राशि में चंद्रमा का गजकेसरी योग बनना विशेष रूप से छात्रों और शिक्षार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी रहेगा। उन्होंने बताया कि वसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा है और केसरी हलवा व बूंदी के लड्डू जैसी पारंपरिक मिठाइयां बनाई जाती हैं।