हमें पहले अंदेशा था कि उपद्रव में उनकी दुकान भी निशाना बन सकती है। इसलिए दुकान के पीछे करीब दो एकड़ की दूरी पर स्थित पशुओं की डेयरी में छिपकर रात को पहरा दे रहे थे। इसी उम्मीद में कि यदि कुछ लोग दुकान को नुकसान पहुंचाने आएंगे तो उन्हें रोक लेंगे। लेकिन 21 फरवरी की रात को जब 200 से 300 की संख्या में उपद्रवी युवकों ने दुकान पर हमला किया तो दीवार के पीछे दुबककर बैठ गए।
रात को आए इन युवकों ने पहले दुकानों में जमकर तोड़फोड़ एवं लूटपाट की। जाते-जाते आग के हवाले कर गए। पुलिस को सूचित किया, लेकिन जब सब कुछ उजड़ चुका था, तभी पुलिस पहुंची। फायर बिग्रेड की गाड़ी ने आग पर आकर काबू पाया। सुबह जब देखा तो सड़क पर अंबाला रोड तक करीब एक किलोमीटर तक लूटी हुई दुकान का सामान बिखरा हुआ था। दुकान के अंदर का सामान लूट लिया गया था तथा बचे-खुचे सामान को आग लगा दी।
हमने अंबाला रोड पर करीब 15 साल पहले चाय बेचकर पाई-पाई एकत्रित की।
इसके बाद मुश्किल से यहां एक दुकान खड़ी की थी। साथ ही ढाबा खोल लिया। इसके बाद साथ में ही किरयाने की दुकान खोल ली। जो उस रात खाक हो गए। किरयाने की दुकान में उधार के लिए एक कॉपी लगाई थी। जिसमें लोगों से करीब डेढ़ लाख रुपये लेने थे। लेकिन आग में वह कॉपी जल गई है। अब वह किस मुंह से लोगों से वह पैसे मांगेंगे। जिस समय दुकान लूटी जा रही थी, उस समय 100 नंबर पर चार बार फोन किए। हर बार पांच मिनट में पुलिस के पहुंचने की बात कही गई। लेकिन पुलिस करीब 45 मिनट के बाद मौके पर पहुंची। तब तक सब कुछ लूट गया था और सब कुछ जल गया था।
अंबाला रोड पर पुलिस नाके पर स्थित सैनी स्वीट्स, किरयाने और साइकिल दुकान चला रहे राजेश सैनी, हरिसिंह और कुलदीप की जुबानी, उनकी बर्बादी की कहानी। 21 फरवरी को उपद्रवियों ने उनकी तीनों दुकानों को लूटपाट के बाद आग के हवाले कर दिया था....