संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। एसडीएम को झुनझुना थमाने से उपजे विवाद में विधायक देवेंद्र हंस के पिता मुंशी हंस भी खुलकर सामने आ गए हैं। वर्ष 1965 की जंग में भाग ले चुके पूर्व सैनिक मुंशी हंस ने स्पष्ट किया कि उनके बेटे ने न तो किसी सैनिक का अपमान किया है और न ही किसी सैन्य अधिकारी के नाम का प्रयोग कर किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
मुंशी हंस ने कहा कि यदि इस घटनाक्रम से किसी भी पूर्व सैनिक को ठेस पहुंची है तो उनका पूरा परिवार सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को तैयार है। उन्होंने साफ किया कि यह माफी केवल पूर्व सैनिकों के सम्मान और भावनाओं के लिए है, न कि किसी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे एसडीएम के लिए। उन्होंने कहा कि यदि एसडीएम पद से इस्तीफा देते हैं तो वे एक आम नागरिक या पूर्व सैनिक के समान हो जाएंगे।
उन्होंने दोहराया कि झुनझुना किसी पूर्व सैनिक को नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी को दिया गया है। सवाल उठाना जायज था इस तरह विरोध करना गलत है।
यदि विधायक रहते हुए मैं गलत कार्य करूं तो जनता मुझे भी झुनझुना थमा सकती है। हलके की जर्जर सडक़ों, प्रशासनिक अनदेखी और जनहित से जुड़े मुद्दों को विधानसभा में भी उठाया था, लेकिन सरकार की ओर से समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। जनता का प्रतिनिधि होने के नाते सवाल उठाना मेरा संवैधानिक और नैतिक कर्तव्य है। स्पष्ट करता हूं कि झुनझुना किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के विरोध का प्रतीक है। -देवेंद्र हंस, विधायक