गुरमीत सीड़ा गुहला चीका। गुहला के खुशहाल माजरा गांव में खेती की जमीन पर चल रहीं राइस मिलें ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) के सैकड़ों राइस मिलें संचालित की जा रही हैं, जिनसे निकलने वाला धुआं और जमीन में छोड़ा जा रहा जहरीला पानी गांव में कैंसर, पेट और त्वचा की गंभीर बीमारियां फैला रहा है।
गौरतलब है कि एक माह पहले नवंबर में सदरेहडी–खुशहाल माजरा रोड पर स्थित दो राइस मिल पूनम राइस मिल और कोहिनूर फूड को प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जमीन में दूषित पानी छोड़ने के आरोप में सील भी किया था। वर्षों से मिल का गंदा पानी बोरवेल के माध्यम से जमीन में प्रवाहित किया जा रहा था। मामले की शिकायत के बाद लिए गए पानी के सैंपल लैब जांच में असफल पाए गए थे जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
नाराज ग्रामीणों ने बताया कि अब तक गांव में कैंसर से आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब एक दर्जन लोग कैंसर की चपेट में हैं। पेट और लीवर की बीमारियों से लगभग पूरा गांव ग्रस्त है। हालात इतने गंभीर हैं कि कई परिवार गांव छोड़कर पलायन कर चुके हैं। कैंसर से जान गंवाने वालों में 45 वर्षीय योगेश्वर, मुकेश और जांगीर सिंह शामिल हैं।
योगेश्वर की तीन नाबालिग बेटियों ने बताया कि उनके पिता की मौत कैंसर से हुई। महिलाओं में नन्ही देवी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राइस मिलों द्वारा जमीन में छोड़ा गया गंदा पानी जमीनी पानी को जहरीला बना रहा है, जिससे उनके पति अमरनाथ की मौत पेट की गंभीर बीमारी के कारण हुई। खुद नन्ही देवी भी पेट के संक्रमण से ग्रस्त हुई थीं।
ग्रामीण कई बार प्रशासनिक अधिकारियों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मानव अधिकार आयोग तक शिकायतें दे चुके हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत और भ्रष्टाचार से मामला दबा दिया जाता है। संवाद
यूएलयू और प्रदूषण प्रमाणपत्र में बड़ा विरोधाभास
चीका निवासी एक व्यक्ति ने आरटीआई के तहत जिला टाउन प्लानिंग और प्रदूषण विभाग से राइस मिलों के सीएलयू और प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी करने की जानकारी मांगी। टाउन प्लानिंग विभाग ने बताया कि उनके रिकॉर्ड में केवल 12 राइस मिलों को ही सीएलयू जारी किया गया है, जबकि पॉल्यूशन कंट्रोल डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में 116 राइस मिलों को कनसेंट टू आपरेट (प्रदूषण) सर्टिफिकेट दिया गया है। इस विरोधाभास से सवाल उठता है कि जिन राइस मिलों के पास सीएलयू ही नहीं है, उन्हें प्रदूषण सर्टिफिकेट कैसे मिला। गांव के सरपंच सर्वजीत कौर और पूर्व सरपंच चांदी राम ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और अवैध रूप से चल रही राइस मिलों को तुरंत बंद करने की अपील की है।
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