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अस्पताल से वीटा का बूथ हटाया

Wed, 08 Jul 2015 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कैथ्ाल
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 डीसी केएम पांडुरंग के आदेशों पर प्रशासन ने जिला अस्पताल से वीटा दूध के बूथ को हटा दिया गया है। बुधवार बाद दोपहर नगर परिषद के कर्मचारियों एवं पुलिस की सहायता से इस बूथ को हटा दिया गया। बूथ संचालक पर दूध के अलावा ब्रेड एवं अन्य खाद्य पदार्थ बिक्री करने का आरोप था। अमर उजाला द्वारा 6 जुलाई के अंक में अस्पताल की दुकानों में महंगे दामों पर बिक रहे खाद्य पदार्थों एवं पार्किंग के लिए प्रवेश द्वार पर ही वसूली नाका लगाए जाने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।

बुधवार दोपहर बाद रैडक्रॉस सचिव बलवान सिंह नगर परिषद एवं पुलिस कर्मचारियों की टीम के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने बूथ को हटवा दिया। कर्मचारियों ने बूथ में रखे सामान को कब्जे में ले लिया। काफी सामान को बूथ संचालक ने स्वयं ही हटा दिया। संचालक दीपक कुमार ने कहा कि उन्हें बूथ हटाने के लिए कोई समय नहीं दिया गया। जिस कारण उसका भारी नुकसान हुआ है। उसके पास आगामी नवंबर माह तक का ठेका है। इसके बावजूद उसे यहां से हटाया जा रहा है। वह इस मामले में न्यायालय की शरण लेगा।
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पार्किंग के ठेके की राशि पर सवालिया निशान
अस्पताल में पिछले दिनों हुई बोली में कैंटीन के लिए 2 लाख 37 हजार रुपये, केवल जूस बेचने के बूथ के लिए 53 हजार रुपये प्रति महीने के हिसाब से बोली छूटी है। ऐसे में महज 17 हजार रुपये प्रति माह पार्किंग के लिए छोड़े गए ठेके की राशि पर सवालिया निशान लग रहे हैं। वीटा बूथ संचालक रहे दीपक कुमार ने बताया कि यहां पार्किंग में आय ज्यादा है। लेकिन इसे मामूली दर पर छोड़ा गया है।

गेट पर ही पार्किंग फीस वसूली जारी
जिला अस्पताल के प्रवेश द्वार पर पार्किंग फीस वसूली का कार्य जारी है। भाजपा के जिला अध्यक्ष राजपाल तंवर सहित कई नेताओं को सूचना दिए जाने के बावजूद इस ओर जिला प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा। पार्किंग फीस ही लेनी है तो अस्पताल में एक जगह निश्चित की जा सकती है। लेकिन प्रवेश द्वार पर ही पार्किंग फीस वसूलने का काम जारी है। जिस कारण मरीजों को प्रवेश द्वार पर रुक कर पहले पार्किंग फीस की पर्ची कटवानी पड़ती है। बाद में उन्हें अस्पताल में जाने दिया जाता है। जबकि लोगों की मांग है कि अस्पताल में किसी एक जगह पार्किंग की जगह निश्चित कर दी जाए। यदि कोई चाहे तो इसमें अपना वाहन खड़ा कर सकता है। ना चाहे तो वह बाहर लेकर जा सकता है। लेकिन प्रवेश द्वार पर ही वसूली नाजायज है।


बच्चे की जान ही जाने वाली थी..
अस्पताल में आए एक व्यक्ति ने बताया कि वे एक बच्चे गंभीर हालत में लेकर अस्पताल में आए थे। जहां गेट पर उन्हें रोक लिया गया। उन्हें पर्ची कटवाने के बाद ही अंदर जाने दिया गया। यदि बच्चे को कुछ हो जाता तो कौन जिम्मेदार होता?

उधर, सिविल सर्जन डा. आरके पूनिया ने बताया कि डीसी के आदेशानुसार वीटा बूथ को हटाया गया है। वह दूध के अलावा चाय एवं पकौड़े बेचता था। दो-तीन बार नोटिस दिए। इसके बावजूद नहीं माना तो हटा दिया। रही बात पार्किंग के ठेके की, इस बारे में डीसी को पत्र लिखेंगे कि इसे प्रवेश द्वार से हटाकर अस्पताल में जगह निश्चित करके वहां फीस ली जाए।
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रेडक्रॉस सचिव बलवान सिंह का कहना है कि अस्पताल से डीसी के आदेशानुसार वीटा बूथ को हटा दिया गया है। पार्किंग का ठेका पूरी पारदर्शिता के साथ छोड़ा गया है। बोली के लिए कमेटी में वे स्वयं, अस्पताल इंचार्ज के अलावा बाल कल्याण विभाग के अधिकारी कार्यालय से एक प्रतिनिधि शामिल थे। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है। रही बात अस्पताल के गेट की तो इसके लिए जगह निर्धारित की जाएगी।
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