कैथल। चंडीगढ़-अंबाला-कैथल हाईवे के लिए सरकार की ओर से अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा बढ़ाने के लिए जिले के आठ गांवों के किसानों ने सोमवार को तितरम मोड़ धरना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि सोमवार को ही अंबाला में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाईवे के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। लेकिन इधर, अब इस पर विवाद शुरू हो गया है। किसानों की मांग है कि मुआवजा राशि 27 लाख से बढ़ाकर 54 लाख रुपये की जाए।
ये है मामला
कैथल से अंबाला तक 95 किमी सड़क का निर्माण होगा। इस पर लगभग 975.70 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कैथल में
नेशनल हाईवे के लिए तितरम मोड़ से बाइपास बनेगा। बाइपास पर पड़ने वाले गांव तितरम, प्यौदा, हरसौला, नरड़, ग्योंग, उद्याना, क्योड़क एवं बेगपुर की लगभग 200 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई है। केंद्र सरकार ने इसके एवज में 119 करोड़ रुपये मुआवजा जारी किया है। इसमें से 64 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। मुआवजे के लिए गांव के कलेक्टर रेट के हिसाब से अलग-अलग राशि तय की गई है। लेकिन अब किसान मुआवजा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और धरना शुरू कर दिया है।
भाकियू के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरने की अध्यक्षता भाकियू के प्रदेश महासचिव भूरा राम पबनावा ने की। संचालन दलबीर प्यौदा ने किया। मुख्य वक्ता सुरेश कुमार कौथ ने कहा कि सरकार शुरुआत से किसान विरोधी फैसले ले रही है। सरकार ने घोषणा की थी कि जब भी किसानों की जमीन अधिग्रहण की जाएगी, किसानों को चार गुणा मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन सरकार अपने वादों से पीछे हटती जा रही है। किसानों को यदि पूरा मुआवजा नहीं दिया तो किसान किसी भी प्रकार की कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटेंगे।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर जमीन के रेट मार्केट के हिसाब से एक करोड़ रुपये बनते हैं। इस हिसाब से किसानों को चार गुणा मुआवजा यानी चार करोड़ रुपये मिलने चाहिए। लेकिन किसानों को 27 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। कुछ गांवों के लिए 45 लाख तो अधिकतर को 27 लाख रुपये दिए जा रहे हैं।
यह अन्याय एवं भेदभाव है। किसान के पास रोजी रोटी चलाने के लिए जमीन एक मात्र सहारा है। यदि किसान की जमीन ही छीन ली जाएगी तो किसान किस प्रकार परिवार का पालन पोषण कर पाएगा। प्रदेश महासचिव भूरा राम ने कहा कि यदि सरकार ने किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया तो किसान किसी भी कीमत पर यहां कार्य को शुरू नहीं होने देंगे। धरनास्थल पर हुक्का गुड़गुड़ाते किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ऐलान किया कि जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मौके पर प्रदेश महासचिव भूरा राम पबनावा, मुख्य वक्ता सुरेश कुमार कौथ, कैथल जिलाध्यक्ष दलबीर पूनिया, पूडंरी बलॉक से हरपाल सिंह, कैथल से युवा जिला प्रधान जसबीर प्यौदा, सुल्तान ग्यौंग, रामपाल नरड़, सूरजभान सेगा, कर्मबीर सेगा किसान मौजूद रहे।
नए एक्ट के अनुसार मुआवजा दिया
जिला राजस्व अधिकारी दलेल सिंह ने बताया कि एक्ट के प्रावधान के अनुसार मुआवजा तय किया है। यहां पहले नेशनल हाईवे एक्ट लागू था। लेकिन अब राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेन्सी इन लैंड एक्वीजिशन, रिहेबलिटेशन एंड रि-सेटलमेंट एक्ट 2013 के तहत मुआवजा तय किया गया है। एक्ट के अनुसार पूरा मुआवजा दिया गया है।