संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जाट कॉलेज के सभागार में शुक्रवार को कम लिंगानुपात वाले 10 गांवों के लिए आयोजित चार दिवसीय चेतना एवं जागरूकता शिविर का समापन हुआ। मुख्य अतिथि उपायुक्त (डीसी) प्रीति ने कहा कि गिरते लिंगानुपात की जिम्मेदारी केवल स्वास्थ्य विभाग की नहीं, बल्कि गांव के प्रतिनिधियों की भी है।
उन्होंने इस पर लगाम लगाने के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर इस गंभीर मुद्दे पर काम करना होगा।
शिविर में काकौत, सांच, करोड़ा, भूना, हरसौला, नौच, पबनावा, बाता, टयोंठा और चंदाना गांव के स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सा अधिकारियों, आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी वर्कर्स और सरपंचों ने भाग लिया। डीसी ने कहा कि इन गांवों में माइक्रो स्तर पर निगरानी से ही लिंगानुपात में सुधार संभव है।
यदि किसी महिला का पहला बच्चा बेटी है, तो उस गर्भवती महिला की विशेष निगरानी की जाए। यदि गर्भपात होता है, तो उसकी कारण और स्थान की जानकारी जुटाई जाए। ऐसे डॉक्टरों की पहचान जरूरी है जो अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं। डीसी ने यह भी कहा कि सभी स्वास्थ्य कर्मी गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य को लेकर सक्रिय रहें और सरकारी योजनाओं का लाभ ज़रूरतमंदों तक पहुंचाएं।
जनप्रतिनिधि भी निभाएं भूमिका ः डीसी ने कहा- यदि कोई व्यक्ति खुलकर सामने नहीं आना चाहता, तो गांवों में सुझाव पेटिकाएं लगाई जाएं या सीधे चिकित्सा अधिकारी को सूचना दी जाए। जनप्रतिनिधियों को भी जागरूकता और निगरानी में भूमिका निभानी चाहिए।
शिविर में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अनुभव साझा किए और संकल्प लिया कि वे कन्या भ्रूण हत्या रोकने में समर्पण से काम करेंगी। कार्यक्रम के दौरान गुहला की एसएमओ डॉ. प्रीति ने सभी को कन्या भ्रूण हत्या न करने, न दहेज लेने और न देने की शपथ दिलवाई।
इस मौके पर डॉ. मीनाक्षी गोयल, डॉ. गौरव पूनिया, बीएसी सतबीर गोपेरा, राजेश कुमार, सभी एसएसएमओ, सरपंच पबनावा कश्मीर सिंह, सरपंच करोड़ा दिनेश कुमार, सरपंच सांच सुरेश कुमार सहित कई अधिकारी आदि उपस्थित रहे।