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संशोधित : झारखंड व महाराष्ट्र के गिरोह कर रहे ठगी, जनता की पूंजी नहीं दिला पा रही पुलिस

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कैथल। झारखंड और महाराष्ट्र के शातिर साइबर अपराधी लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं। पिछले छह महीनों यानी जनवरी से अब तक साइबर ठगी के 52 मामले सामने आए हैं। इन मामलों में ठगों ने अलग-अलग हथकंडे अपनाकर जनता के करीब 3.56 करोड़ रुपये साफ कर दिए। पुलिस का नेटवर्क ठगों को पकड़ने और डूबी हुई पूंजी रिकवर करने में पूरी तरह कमजोर नजर आ रहा है।
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पुलिस लोगों की ठगी हुई पूंजी नहीं दिला पा रही है। प्राथमिकी दर्ज करने तक ही कार्रवाई में तेजी देखी जा सकती है। ठगी की रकम ट्रांसफर होते ही कई फर्जी खातों में बांट दी जाती है। तकनीकी संसाधनों की कमी और अंतरराज्यीय समन्वय ठीक न होने के कारण पुलिस न तो समय पर बैंक खाते फ्रीज करवा पा रही है और न ही आरोपियों के ठिकानों तक पहुंच पा रही है। नतीजा यह है कि जनता की गाढ़ी कमाई रिकवर होने की दर 10 प्रतिशत भी नहीं है। वहीं गिरफ्तारी भी न के बराबर है। पुलिस जांच में सामने आया है कि झारखंड और महाराष्ट्र के विभिन्न शहरी इलाकों से ये नेटवर्क संचालित हो रहे हैं।



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ऐसे शुरू होता है झांसे का खेल



ये गिरोह सबसे पहले लोगों को बिना अनुमति के विभिन्न टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ते हैं। इसके बाद अपराधियों की ओर से लोगों को घर बैठे ऑनलाइन टास्क पूरा करने, डिजिटल रेटिंग देने और शेयर मार्केट या क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर मोटा पैसा कमाने का लालच दिया जाता है। शुरुआत में थोड़ा मुनाफा दिखाकर विश्वास जीता जाता है। इसके बाद जब पीड़ित बड़ी रकम निवेश कर देता है, तो आरोपी खाता ब्लॉक कर गायब हो जाते हैं। इसके अलावा, डिजिटल अरेस्ट और रिश्तेदार या जानकार बनकर आपातकाल में पैसे मांगने का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ा है। ठग खुद को सीबीआई, पुलिस या कस्टम अधिकारी बताते हैं। वे पीड़ितों को डराकर या उनके किसी करीबी का एक्सीडेंट होने का झूठा नाटक रचकर तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर करवा रहे हैं।
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गृहिणियों को पार्ट-टाइम जॉब का ऑफर

तकनीकी रूप से कम जागरूक बुजुर्गों और महिलाओं को शिकार बनाया जा रहा है। घर में अकेली रहने वाली गृहिणियों को पार्ट-टाइम जॉब का ऑफर दिया जाता है। वहीं, रिटायर्ड कर्मचारियों को उनकी जमा-पूंजी को दोगुना करने का लालच देकर जाल में फंसाया जा रहा है। तकनीकी समझ की कमी के कारण कई बार पीड़ित तुरंत पुलिस के पास भी नहीं पहुंच पाते जिसका पूरा फायदा ये गिरोह उठा रहे हैं।



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जनवरी से जून तक आए मामले



माह - मामले - ठगी

जनवरी 17 13527280



फरवरी 7 1919716

मार्च 13 7021016



अप्रैल 7 10999870

मई 7 2134445



जून 1 82000

नोट : आंकड़े पुलिस की तरफ से दिए गए हैं।



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कैसे रहें सुरक्षित



- साइबर फ्रॉड से बचने का एकमात्र उपाय है जागरूकता

- किसी भी अनजान टेलीग्राम या व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल होने से बचें।



- यदि कोई अनजान व्यक्ति खुद को रिश्तेदार बताकर तुरंत पैसों की मांग करे, तो पहले सीधे फोन कर सच्चाई जानें।

- किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच जरूर करें।



- यदि आप ठगी के शिकार होते हैं, तो बिना देर किए केंद्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।







पुलिस लगातार ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए कार्रवाई कर रही है लेकिन आमजन की सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी थाना-साइबर पुलिस स्टेशन पर दें। - मनप्रीत सिंह सूदन, एसपी
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