संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। गेहूं के पौधों में असमय बालियां निकलने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। फरवरी माह में मौसम में आए बदलाव के चलते गेहूं की फसल में समय से पहले बालियां निकलने लगी हैं। इससे फसल के समय से पूर्व पकने और बालियों में दाने नहीं बनने की आशंका जताई जा रही है, जिससे पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कलायत निवासी किसान राजेंद्र राणा और प्रदीप राणा ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में नवंबर के प्रथम सप्ताह में गेहूं की किस्म 303 की बुवाई की थी। अब फरवरी के पहले सप्ताह में ही फसल में बालियां निकलने लगी हैं। किसानों का कहना है कि यदि फसल समय से पहले पक गई तो पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे किसान वर्ग में बेचैनी बनी हुई है।
कृषि वैज्ञानिक की सलाह ः इस समस्या पर कृषि विज्ञान केंद्र, कैथल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि अक्तूबर के अंत और नवंबर के प्रथम सप्ताह में बोई गई गेहूं की फसलों में यह समस्या सामान्य रूप से देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि नवंबर और दिसंबर में तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण गेहूं की फसल में यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि इस स्थिति को “इयर हेड फॉर्मेशन” कहा जाता है। यदि फरवरी के पहले पखवाड़े में गेहूं की फसल में बालियां निकलने लगें, तो किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने सलाह दी कि जिन खेतों में यह समस्या दिखाई दे रही है, वहां किसान 2 किलोग्राम पोटाशियम नाइट्रेट को 100 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें। इससे पौधे की ऊर्जा बालियों की बजाय फुटाव (टिलरिंग) की ओर परिवर्तित हो जाएगी और असमय बालियां निकलना रुक जाएगा।
उन्होंने बताया कि 15 दिन के अंतराल के बाद यही स्प्रे दोबारा करना आवश्यक है। इस उपचार से फसल की पैदावार पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
पीला रतुआ पर रखें नजर
डॉ. वर्मा ने किसानों से आग्रह किया कि वे इस समय अपनी गेहूं की फसल को सुबह और सायं नियमित रूप से निरीक्षण करें। यदि कहीं भी फसल में पीलापन नजर आए तो तुरंत कृषि विभाग से संपर्क कर पीला रतुआ रोग का समय रहते उपचार कराएं, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।