महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, भारतीय शिक्षण मंडल, सामाजिक समरसता एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता की याद के उपलक्ष्य में जीवन दर्शन विषय पर सेमिनार का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में ब्रह्मर्षि महाविद्यालय पंचकूला की प्राचार्या डॉ. अमृता मुख्यातिथि रही। विवि के कुलपति डॉ. श्रेयांश द्विवेदी, कुलसचिव प्रो. यशवीर सिंह एवं प्रो. राजेश्वर प्रसाद मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यातिथि ने कहा कि आयरलैंड का मूल निवासी जो पहले वहां गया था वह भारत का वैदिक ऋषि था जो गाय को लेकर भारत से आयरलैंड गया था और निवेदिता उन्हीं में से एक वैदिक ऋषि की पुत्री थी जो भारत वापस आई थी । उन्होंने कहा दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए थे जिनमें सभी जीव-जंतु शामिल हैं, मनुष्य को उनसे भी कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने निवेदिता के ऐसे ही बहुत से उदाहरण दिए । विश्व ब्राह्मण संघ के अध्यक्ष डॉ. कैलाश चन्द्र दिल्ली से कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने कहा कि भगिनी निवेदिता का जीवन बहुत ही सादगीपूर्ण रहा है। उन्होंने साधारण से विद्यालय को केंद्र बनाकर कार्य प्रारंभ किया। विवि के कुलपति डॉ. श्रेयांश द्विवेदी ने कहा कि शिक्षा केवल प्रमाण पत्रों में ही रह गई है इससे सामाजिक समरसता कभीं नही आ पाएगी । इस मौके पर विवि के प्रो. सत्यप्रकाश दूबे, उप कुलसचिव डॉ. रविभूषण गर्ग मौजूद रहे।