संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। सीवन और कांगथली में शुक्रवार को स्वच्छता व्यवस्था में सामने आए भारी घोटाले के बाद विधायक देवेंद्र हंस अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस मामले में संलिप्त लोगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे स्वयं जनता के साथ मिलकर डंपिंग ग्राउंड पर धरने पर बैठेंगे।
विधायक ने कहा कि यह मामला केवल कचरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर करता है—जहां न तो कार्य नियमानुसार हो रहा है और न ही किसी की जवाबदेही तय है।
उन्होंने सवाल उठाया कि बिना दस्तावेजों के कचरा ढोने वाली गाड़ियां किसके आदेश पर चलाई जा रही थीं? क्या यह सब प्रशासन की जानकारी के बिना हो रहा था, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी गईं?
देवेंद्र हंस ने कहा कि स्वच्छता की आड़ में चल रहा यह खेल केवल एक कंपनी की लापरवाही नहीं दर्शाता, बल्कि यह उसे संरक्षण देने वाले तंत्र की भी पोल खोलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि डंपिंग ग्राउंड की दुर्दशा कोई नई नहीं है, लेकिन वर्षों से अधिकारी केवल फाइलों में ही सफाई करते रहे हैं। जमीनी स्तर पर कभी कोई ठोस पहल नहीं की गई।
विधायक ने प्रशासन को सात दिन की मोहलत देते हुए कहा कि यदि तय समय में डंपिंग ग्राउंड की चारदीवारी नहीं बनाई गई, कचरे के सुरक्षित प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था नहीं हुई और जिम्मेदार कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर नई निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो वे न केवल धरने पर बैठेंगे बल्कि इस घोटाले को विधानसभा में भी प्रमुखता से उठाएंगे।
उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि एक ओर सरकार स्वच्छता अभियान की दुहाई देती है, तो दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि गंदगी की व्यवस्था को ही स्थायी बना दिया गया है।
विधायक देवेंद्र हंस ने दो टूक कहा कि जनता की आंखों में धूल झोंककर फर्जी काम करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया, -22 वर्षों के टेंडर का आवंटन किस आधार पर किया गया? क्या किसी ने यह जांचा कि संबंधित कंपनी वास्तव में कितनी योग्य है? विधायक ने यह भी पूछा कि जब जनता की ओर से लगातार शिकायतें आ रही थीं, तब प्रशासन की चुप्पी क्या किसी मिलीभगत की ओर इशारा नहीं करती?
खुले में फैला कचरा, दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और किसानों के खेतों तक पहुंचता गंदा पानी—यह सब गवाही देता है कि व्यवस्था ने अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ लिया है। -देवेंद्र हंस, विधायक