संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। बिजली बिल सही कराने के बदले 22 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किए गए बिजली निगम के लिपिक गुलाब सिंह को शनिवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं, कैशियर हैप्पी को अदालत ने मामले में गवाह मानते हुए रिहा कर दिया। उनके धारा 164 के तहत न्यायिक बयान दर्ज किए गए।
क्या है मामला ः शिकायत गांव बालू निवासी सुनील कुमार की ओर से दी गई थी। उन्होंने बताया कि उनके चाचा का बिजली मीटर बिल अधिक होने की वजह से काट दिया गया था। सरकार की स्कीम के तहत बिल दुरुस्त करवाने के लिए एलडीसी गुलाब सिंह ने 22 हजार रुपये की मांग की।
पहली किश्त के रूप में 8500 रुपये गुलाब सिंह को दिए गए। इनमें से 3600 रुपये से बिल जमा कर रसीद दी गई, लेकिन शेष 4900 रुपये गुलाब सिंह ने निजी तौर पर रख लिए। बाकी 17 हजार रुपये एक अगस्त को देने को कहा गया था।
एसीबी की कार्रवाई ऐसे हुई
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शिकायत के बाद जींद एसीबी ने योजना बनाकर कार्रवाई की।
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जन स्वास्थ्य विभाग पिल्लूखेड़ा के एसडीओ को ड्यूटी मजिस्ट्रेट बनाया गया।
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सुनील से 17 हजार रुपये के नोटों पर रंगीन रसायन लगाया गया।
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सुनील तय समय पर बिजली निगम पहुंचा और पैसे गुलाब सिंह को देने लगा, लेकिन गुलाब सिंह ने पैसे कैशियर हैप्पी को देने के लिए कहा।
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कैशियर ने पैसे लेकर 17 हजार की रसीद काट दी।
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उसी समय एसीबी की टीम ने दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
बिजली निगम के लिपिक गुलाब सिंह व कैशियर हैप्पी को रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। शनिवार को दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से गुलाब सिंह को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जबकि कैशियर को गवाह बनाते हुए रिहा कर दिया गया। -सूबे सिंह, प्रभारी, एसीबी कैथल