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Kaithal News: उफ! गंदगी... स्वच्छता की परीक्षा में फिर से पिछड़ने का है डर

Wed, 17 Dec 2025 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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शहर के प्रताप गेट पर लगे कूड़े के ढेर। संवाद
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नरेंद्र पंडित
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कैथल। स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार पिछड़ने के बावजूद नगर परिषद सुधार को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है। वर्ष 2025 की स्वच्छता परीक्षा के लिए नगर परिषद की तैयारियां फिलहाल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही हैं। शहर के बाजार, वार्ड, कालोनियां, मुख्य सड़कें और शिक्षण संस्थानों के आसपास लगे कूड़े के ढेर व्यवस्था की असल तस्वीर बयां कर रहे हैं।



हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद द्वारा डोर-टू-डोर कचरा उठान पर प्रतिवर्ष करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था बदहाल बनी हुई है। जब नगर परिषद की ओर से अधिकृत सुगम स्वच्छता एजेंसी के माध्यम से नियमित कचरा उठान किया जा रहा है, तो फिर सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर कूड़े के ढेर कहां से लग रहे हैं, यह अपने आप में गंभीर सवाल है।
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करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि सफाई व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आ रही, तो यह नगर परिषद के अधिकारियों की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। मौजूदा हालात को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि शहर इस बार भी स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ सकता है।



160 सफाई कर्मचारी काम छोड़कर बैठे, दो माह से टेंडर अटका

नगर परिषद में सफाई व्यवस्था की बदहाली का एक बड़ा कारण कर्मचारियों की कमी और प्रशासनिक सुस्ती भी है। नगर परिषद के 160 सफाई कर्मचारी पिछले करीब दो माह से काम छोड़कर बैठे हैं, क्योंकि संबंधित अधिकारियों द्वारा उनके कार्य का टेंडर अब तक नहीं कराया जा सका है।



नगर पालिका सफाई कर्मचारी संघ के प्रधान महेंद्र के अनुसार, कैथल शहर में करीब 800 सफाईकर्मियों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में 400 से भी कम कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से भी बड़ी संख्या नियमित रूप से काम पर नहीं है। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था कैसे सुधरेगी, यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है।



सफाई व्यवस्था शून्य पर पहुंच चुकी है : पार्षद

वार्ड नंबर-11 की पार्षद सुशीला शर्मा ने नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि डोर-टू-डोर कचरा प्रबंधन पर नगर परिषद करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन इसके बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था शून्य पर पहुंच चुकी है।



उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों, बाजारों और वार्डों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। जब धरातल पर सफाई नहीं होगी, तो स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में सुधार कैसे संभव है। लगातार गिरती रैंकिंग नगर परिषद प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि सफाई व्यवस्था पर ईमानदारी से ध्यान दिया जाए, तो हालात सुधर सकते हैं।
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स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ने के प्रमुख कारण

सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति

कचरा निस्तारण केंद्रों का कमजोर प्रबंधन

जनसंख्या के अनुपात में सफाईकर्मियों की भारी कमी

ठेका आधारित डोर-टू-डोर कचरा प्रबंधन में अनियमितताएं

डंपिंग यार्ड में समय पर कूड़े का निस्तारण न होना



देश में स्वच्छता सर्वेक्षण में कैथल की रैंकिंग

वर्ष
रैंकिंग

2017
282

2018
301

2019
355

2020
199

2021
304

2022
177

2023
365

2024
502



सफाई को लेकर गंभीर हैं : सचिव

नगर परिषद के सचिव पवन शर्मा ने कहा कि शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर परिषद गंभीरता से कार्य कर रही है। घर-घर जाकर कचरा उठान किया जा रहा है और स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग के लिए तैयारियां की जा रही हैं।

शहर के प्रताप गेट पर लगे कूड़े के ढेर। संवाद

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