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Kaithal News: प्रदेश की राइस मिलर एसोसिएशन में दो फाड़

Tue, 08 Oct 2024 05:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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गुरमीत सीड़ा गुहला-चीका। अग्रवाल धर्मशाला चीका में सोमवार को राइस मिलरों की प्रदेश स्तरीय बैठक हुई। इसमें धान खरीद के मुद्दे पर चल रही हड़ताल खोलने के संबंध में विचार विमर्श किया गया लेकिन काफी जद्दोजहद के बावजूद एसोसिएशन के पदाधिकारी कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाए।
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बैठक में मौजूद कुछ सदस्य हड़ताल खोलने की मांग कर रहे थे तो कुछ सदस्य 10 अक्तूबर तक हड़ताल जारी रखने की मांग कर रहे थे। नतीजा, प्रदेश की राइस मिलर एसोसिएशन में दो फाड़ हो गए। एक एसोसिएशन से जुड़े मिलरों ने हड़ताल खोलने की बात कही लेकिन दूसरी के सदस्य हड़ताल करने पर अड़े रहे।

बैठक के दौरान राइस मिलरों की दोनों एसोसिएशन के सदस्यों के बीच विवाद भी हो गया। इसमें एक एसोसिएशन के प्रधान से माइक छीना तो वे भड़क गए। बैठक में हरियाणा की दोनों राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान अमरजीत छाबड़ा व हंस राज सिंगला, राम स्वरूप जिंदल, ज्वैल सिंगला, महासचिव राजेंद्र ढांड, उत्तरी हरियाणा प्रधान सतपाल, मनीष बंसल, नरेश बंसल आदि शामिल थे।
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हंसराज सिंगला ने कहा कि पूरे प्रदेश के राइस मिल मालिक एकजुट होकर हड़ताल पर हैं, ताकि सरकार से अपनी मांगें मनवा सकें। कहा कि हड़ताल के बावजूद कुछ मिलर धान खरीद रहे है जो ट्रेड के नियमों के खिलाफ है। ऐसे मिलरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हंस राज ने कहा कि पंजाब सरकार की तर्ज पर हरियाणा सरकार भी राइस मिलरों की मांगे तुरंत माने, क्योंकि प्रदेश का राइस मिल उद्योग पूरी तरह ठप हो चुका है। अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि जो मिलर एसोसिएशन से बाहर जाकर धान खरीद रहे है उन्हें भी हड़ताल में शामिल करने का प्रयास करेंगे।

चीका की एक राइस मिल एसोसिएशन नहीं है हड़ताल में शामिल ः चीका में राइस मिलर एसोसिएशन की दो यूनियनें बनी हुई है। एक यूनियन से जुड़े मिलर अभी तक हड़ताल पर चल रहे हैं जबकि दूसरी यूनियन से संंबंधित मिलर मंडी में धान खरीद का कार्य धड़ल्ले से कर रहे हैं। चीका राइस मिल एसोसिएशन

के प्रधान महावीर मटोरिया ने बताया कि आज की बैठक के बारे में उन्हें काई जानकारी नहीं है। उनकी यूनियन की कोई हड़ताल नहीं हैं। संवाद
ये हैं मुख्य मांगें
प्रदेश के राइस मिलरों की मांग है कि ठेकेदारी प्रथा बंद कर लोडिंग, अनलोडिंग व स्टेकिंग का पैसा मिलरों को दिया जाए। क्रेट व तिरपाल का किराया दिया जाए, होल्डिंग चार्ज न वसूला जाए, चावल लगाने के लिए जगह देना, एक क्विंटल धान के बदले 60 किलो चावल लेना, मिलिंग चार्ज 200 रुपये देना शामिल हैं। मिलरों का कहना है कि जब केंद्र सरकार एफआरके के नाम पर 73 रुपये प्रति क्विंटल दे रही है तो सरकार इसका टेंडर न कर मिल मालिकों को एफ आरके का अधिकार दे।
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