संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। सदरेहडी–खुशहाल माजरा रोड पर स्थित दो राइस मिल पूनम राइस मिल और कोहिनूर फूड को प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जमीन में दूषित पानी छोड़ने के आरोप में सील कर दिया है। वर्षों से मिल द्वारा गंदा पानी बोरवेल के माध्यम से सीधे जमीन में प्रवाहित किए जाने की शिकायतों के बाद लिए गए पानी के सैंपल लैब जांच में असफल पाए गए, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार, मिल परिसर से निकलने वाला गंदा पानी और टॉयलेट का अपशिष्ट एक बोरवेल के जरिए सीधे जमीन में डाला जा रहा था। इसी बोरवेल से बारिश का पानी भी जमीन में भेजा जाता था। पर्यावरणीय मानकों की लगातार अनदेखी की शिकायतों के बाद प्रदूषण विभाग कैथल की टीम ने मौके पर पहुंचकर सैंपल लिए थे, जिनकी रिपोर्ट मानकों पर खरी नहीं उतरी। रिपोर्ट फेल होते ही विभाग ने तत्काल दोनों मिलों को सील कर दिया।
भाकियू चढूनी के प्रदेश उपाध्यक्ष चमकौर बनेड़ा ने विभाग पर ढिलाई का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों से पराली जलाने पर भारी जुर्माना वसूला जाता है, जबकि मिलों पर हमेशा नरमी बरती जाती है।
समस्या के संदर्भ में सरपंच गुरजंट सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदूषण विभाग के कुछ अधिकारी मिल मालिकों से मिलीभगत कर गलत रिपोर्ट तैयार करते हैं, जिससे सरकार व आयोग दोनों को गुमराह किया जाता है।
125 में से कई राइस मिलें मानकों की कर रहीं अनदेखी
गुहला-चीका क्षेत्र में करीब 125 राइस मिलें संचालित हैं, जिनमें से कई मिलें प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन नहीं कर रहीं। कुछ मिलें अपशिष्ट जल को सड़कों पर बहा रही हैं, तो कुछ बोरवेल से इसे सीधे जमीन में डाल रही हैं, जिससे भूमिगत जल बेहद प्रदूषित हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस जल प्रदूषण का दुष्प्रभाव क्षेत्र में कैंसर, काला पीलिया, थायरॉयड और चर्म रोग जैसी गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों के रूप में सामने आ रहा है। खुशहाल माजरा के सरपंच गुरजंट सिंह, पंच गुरमेज सिंह, प्रवीन कुमार, सतनाम सिंह, जसवीर सीड़ा और लाडी ने बताया कि आसपास की लगभग 40 राइस मिलें दूषित पानी जमीन में प्रवाहित कर रही हैं, जिससे पेयजल पीने योग्य नहीं रह गया है। ग्रामीणों ने दो वर्ष पूर्व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत भी दी थी, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण अभी तक ठोस परिणाम नहीं मिल सके।
पूनम व कोहिनूर राइस मिल के मालिक बोरवेल के माध्यम से गंदा पानी जमीन में डाल रहे थे। सैंपल जांच में पानी अस्वीकृत पाया गया। रिपोर्ट मिलने के बाद मिल को सील कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अन्य मिलों के सैंपल की रिपोर्ट लंबित है। - सतीश कुमार, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, कैथल