संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कमालपुर मेंं तालाब और श्मशान की भूमि को लेकर सालों से चल रहे विवाद में शनिवार को गांव में तनाव की स्थिति बन गई है। समस्या सुलझाने के लिए रविवार को अफसर फिर जुटेंगे।
मामले को निपटाने के लिए एसडीएम कैथल अजय जांगडा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारी ने दोनों पक्षों को बैठा कर मामले को एक बार तो सुलझा लिया पर कुछ ही देर में दूसरे पक्ष ने लिखे गए समझौते को मानने से इन्कार दिया। इससे तनाव फिर से बढ़ गया।
गौरतलब है कि खसरा नंबर 133-134 पर काफी लंबे समय से विवाद है। उच्च न्यायालय में केस भी चल रहा है, जिसकी पेशी 25 मई को है। राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि कोल्हू के नाम दर्शाई गई है। इस भूमि में एक तालाब बना हुआ है और पास ही पंडितों के श्मशान बने हैं।
इस संबंध में जाट समाज का कहना है कि जब सरकार ने खसरा नंबर 183-184 संडील रोड़ पर श्मशान के लिए जगह निर्धारित की हुई है तो संस्कार वहां होना चाहिए। उनका कहना है कि यह स्थान बस्ती के लगभग बीच में आ गया है जिस पर उन्हें आपत्ति है।
ऐसे शुरू हुआ विवाद ः एक सप्ताह पूर्व ग्राम पंचायत ने खसरा नंबर 133-134 में स्थित तालाब की खोदाई का प्रस्ताव डाला था। तालाब की खोदाई से निकलने वाली मिट्टी को जब इस खसरे में स्थित श्मशान घाट में डालना शुरू किया तो दूसरे समुदाय ने उसका विरोध कर दिया।
तालाब से निकली मिट्टी को लेकर उपजे विवाद को सुलझाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम कैथल व पुलिस बल को भेजा गया। एसडीएम ने दोनों पक्षों को बैठा कर इस बात पर राजी कर लिया की तालाब की खोदाई से निकलने वाली आधी मिट्टी एक श्मशान और आधी मिट्टी दूसरे श्मशान घाट में डाली जाएगी।
लगभग तीन तीन ट्रालियां दोनों श्मशान घाटों में जा भी चुकी थीं कि जाट समुदाय ने उसका फिर से भारी विरोध कर दिया। एसडीएम को भी भला बुरा कहा। नजाकत को देखते हुए डीएसपी कलायत ललित व एसएचओ तितरम कृष्ण कुमार को भी और पुलिस बल के साथ मौके पर बुलाया गया। समाधान न होने पर रविवार को फिर से बातचीत की बात कही गई।