गांव फरल में गुरु रविदास मंदिर और फल्गु तीर्थ के पास स्थित जोहड़ में मछली पकड़ने के चक्कर में 11 वर्षीय प्रिंस और छह वर्षीय आयुष की डूबने से मौत हो गई। रविवार दोपहर के समय दो बच्चों के डूबने से पूरे इलाके में हाहाकार मच गया, लेकिन थाना पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाई। पुलिस मौके तक पर नहीं पहुंची, ग्रामीणों ने ही मशक्कत कर सोमवार को दोनों बच्चों के शव ढूंढ लिए। इस बाबत एसएचओ निर्मल सिंह का कहना है कि उन्हें इसकी सूचना नहीं मिली, इसलिए पुलिस मौके पर नहीं पहुंच पाई।
रविवार दोपहर के समय चार बच्चे जोहड़ के पास खेल रहे थे। जिनमें प्रिंस पुत्र सिंदर और आयुष पुत्र राजेश भी शामिल थे। खेलते-खेलते जब वे जोहड़ के पास पहुंचे तो उन्हें जोहड़ में मछली के बच्चे तैरते हुए दिखे। मछली के बच्चों को पकड़ने के लिए चारों बच्चे जोहड़ में उतर गए। मछली को पकड़ने के लिए वे बच्चे आगे-आगे गहराई की ओर बढ़ते गए। जहां पानी में बच्चे उतरे थे। वहां पर पानी काफी कम था, जबकि कुछ आगे पानी बहुत गहरा था। इसका अनुमान वे नहीं लगा सके। जैसे ही आगे वाले दोनों बच्चे गहरे पानी में डूबने लगे तो पीछे चल रहे दोनों बच्चे डूबते हुए बच्चों के घर बताने के लिए पानी से बाहर आकर दौड़ पड़े। जब तक परिजन वहां पर पहुंचे तो काफी देर हो चुकी थी। दर्जनों लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद जोहड़ में डूबे बच्चों को सोमवार को बाहर निकाला, तब तक बच्चों की मौत हो चुकी थी, लेकिन परिजन यह मानने को तैयार ही नहीं थे। इसलिए वे उनको लेकर कैथल आए। जहां पर डाक्टरों ने जांच के बाद बच्चों को मृत घोषित कर दिया। सोमवार को दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। डूब कर मरने वाले बच्चे प्रिंस के परिवार में उसके चार भाई बहन हैं। आयुष के पांच भाई बहन हैं। गांव में बच्चों की मौत से मातम सा छा गया। ग्रामीणों ने बताया कि प्रिंस तीसरी कक्षा में पढ़ता था और आयुष का अभी दाखिला होना था। लॉकडाउन के बाद स्कूल जाना शुरू करना था।
जहां पर बच्चे डूबे वहां पर कई बच्चे जोहड़ में खेल रहे थे। दो बच्चों के डूबने से बाकी बच्चे घबराकर भाग गए। इससे ग्रामीणों मेें और बच्चे डूबने के संदेह के चलते दोनों बच्चों के शव मिलने के बाद भी दर्जनों लोग जोहड़ में खोजबीन करते रहे। पास के गुरुद्वारे के लाउडस्पीकर में घोषणा करवाई गई कि सभी मोहल्ले वाले अपने-अपने बच्चों को देखें कि वे उनके पास हैं। कई घंटे बाद सभी बच्चों के घरों में सही सलामती के बाद जोहड़ से खोजबीन बंद हुई।
बच्चों के जोहड़ में डूबने के बारे में पुलिस को सूचना नहीं मिल सकी। इसलिए पुलिस मौके पर नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों ने ही बच्चों के शव जोहड़ से ढूंढकर बिना पोस्टमार्टम के ही अंतिम संस्कार कर दिया।
निर्मल सिंह, एसएचओ, थाना पूंडरी