संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। चीका में बेसहारा पशुओं की समस्या से शहरवासियों को निजात नहीं मिल रही है। अब बेसहारा पशुओं के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। इस चुनाव में शहर के लिए यह भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा है।
ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि चीका शहरी क्षेत्र की सभी मुख्य सड़कों पर निराश्रित घूमते गोवंश की दुर्दशा का जिम्मेदार आखिर कौन है। करीब पांच महीने पहले ही शहर के कुछ समाजसेवी लोगों की मुहिम पर नगरपालिका ने सड़कों से गायों को पकड़ते हुए उन्हें गोशाला तक पहुंचाया था, जिसमें चीका की गोशाला ने भी अपनी भूमिका निभाई थी। परंतु यह प्रयास भी पूरी तरह से सिरे नहीं चढ़ पाए, क्योंकि जितनी गायों को विशेष अभियान के तहत गोशाला या नंदीशाला में पहुंचाने का काम किया था वो फिर से सड़कों पर निराश्रित अवस्था में देखी जा सकती हैं।
सबसे ज्यादा समस्या रात की है। सड़कें इन छुट्टा पशुओं का अड्डा बन जाती हैं। झुंड की शक्ल में सड़क के बीच में खड़े ये पशु आए दिन दुर्घटना के कारण बनते हैं। प्रशासन भी इन बेसहारा पशुओं के आगे बेबस लगता है।
इसके विपरीत दिन में बेसहारा पशु दूर से ही दिखाई देते हैं। जिससे हम अपना वाहन धीरे करके किनारे से आगे निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय सड़कों पर झुंड बना बैठे पशु हादसे का कारण
बनते हैं।
ऐसे कई बार वाहन चालक को समझ ही नहीं आता कि सामने कोई पशु है। अचानक से ठीक सामने आकर ब्रेक लगाने पड़ती है। जिस वजह से दुर्घटनाओं का भय बना रहता है।
घायल गायों को उठाने के लिए वाहन तक नहीं
पूरे क्षेत्र में घायल बेसहारा गायों के उठाने के लिए एक वाहन तक उपलब्ध न होना कई सवाल खड़े करता है। इस काम के लिए एक ऐसी लिफ्टेड मशीन की आवश्यकता होती है, जिससे गायों को घायल अवस्था होने पर रेस्क्यू किया जा सके। वहीं गायों के उपचार के लिए एक सुरक्षित छोटे अस्पताल की व्यवस्था भी होनी चाहिए, जहां पर गायों को घायल अवस्था में उपचार प्राप्त हो सके। -कुलबीर पूनिया, शहरवासी।
उपचार के अभाव में मौत का ग्रास बनते हैं गोवंश
कई बार तो गोवंश और बेसहारा गोमाता उपचार के अभाव में तड़प-तड़प कर मौत का ग्रास बन जाती हैं। गुहला-चीका क्षेत्र में सड़कों पर घूम रहे आवारा सांड भी काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इसका कोई समाधान नहीं हो पाया है। पहले 2014 में भाजपा की सरकार रही और 2019 में सरकार की सहयोग पार्टी जजपा का विधायक रहा, लेकिन इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं खोजा गया है। सबसे ज्यादा परेशानी रात में होती है क्योंकि राहगीर हादसे के शिकार बन जाते हैं। - ओमप्रकाश, व्यापारी।
चीका नगर पालिका प्रशासन की ओर से समय-समय पर इस समस्या के समाधान के लिए उचित कदम उठाए गए हैं। जैसे ही कोई शहरवासी गोवंश की समस्या की शिकायत देता है तो उसके लिए संबंधित प्रशासन को अवगत करवाया गया है। वह उसे पकड़कर गोशाला में ले जाकर छोड़ देते हैं।
मांगेराम जिंदल, भाजपा मंडल अध्यक्ष, कैथल।