कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के अगदतंत्र विभाग ने मंगलवार को अवेयरनेस एंड आइडेंटिफिकेशन, नॉलेज एंड इंफॉर्मेशन ऑन स्नेक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें स्नेकमैन ऑफ हरियाणा सतीश फफड़ाना और राजस्थान के कई विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकना था।
सतीश फफड़ाना ने बताया कि देश में हर साल बड़ी संख्या में लोग सर्पदंश से जान गंवाते हैं। समय पर उचित उपचार से अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है। जानकारी के अभाव और झाड़-फूंक पर भरोसा करने से मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। उन्होंने कोबरा, कॉमन क्रेत, रसेल्स वाइपर सहित विभिन्न सांपों की पहचान बताई। साथ ही सर्पदंश के लक्षणों की जानकारी भी दी।
फफड़ाना ने कहा कि भारत में अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते। जहरीले सांप के काटने पर भी हर बार विष शरीर में पहुंचना जरूरी नहीं। लक्षण न दिखने पर भी चिकित्सकीय जांच आवश्यक है। संस्थान प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, डॉ. सतबीर चावला, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. अंबिका धीमान, राजस्थान से स्नैकमैन नरेंद्र, गौरव, दीपक, राजकुमार, रवि, मुकेश जांगड़ा, नवजोत सिंह, पवन आदि मौजूद रहे। संवाद
सर्पदंश और बचाव के उपाय
सर्पदंश की स्थिति में मरीज को बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाना चाहिए। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम दिया जाना चाहिए। सांप के काटने पर घाव की फोटो खींचें, उसे धोएं और झाड़-फूंक से बचें। घर में सांप घुसने से रोकने के लिए साफ-सफाई रखें और फर्श पक्का रखें। बिस्तर के नीचे जूते या सामान न रखें और मच्छरदानी लगाकर सोएं।