बेटा होने की दवा देने के आरोपी को अदालत ने तीन माह के कारावास की सजा सुनाई है। इस तरह के मामले में प्रदेश का यह संभवत: पहला मामला है। जिसमें बेटा होने की दवा देने के मामले में किसी को सजा हुई है। जून माह में कैथल स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यह छापेमार कार्रवाई की थी। जिसमें अदालत ने आरोपी को 1 हजार रुपये जुर्माने की भी सजा सुनाई है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने अब तक प्रदेश में सर्वाधिक 11 मामले दर्ज करवाए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 27 जून को डा. बीबी कक्कड़ के नेतृत्व में छापेमार कार्रवाई की थी। जिसमें गांव बीरबांगड़ा निवासी बिजेंद्र सिंह के प्रतिष्ठान पर एक महिला को बेटा होने की दवा देने की सूचना के बाद छापा मारा गया था। हालांकि बिजेंद्र सिंह मौके से फरार हो गया था।
लेकिन बाद में इस मामले में पुलिस ने बिजेंद्र सिंह के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया था। जिसमें पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी कर लिया था। मामले में छह माह में ही सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी बिजेंद्र शर्मा को पीएनडीटी एक्ट के तहत दोषी करार दिया। जिसमें तीन माह के कारावास एवं 1 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। छापेमार दल में बीसीए सुनील दहिया, राजेश कुमार, डीपीएम नरेंद्र राणा भी शामिल थे।
दुनिया में कोई दवा नहीं बदल सकती लिंग
सीएमओ डा. वंदना भाटिया ने बताया कि दूनिया में ऐसी कोई दवा नहीं है। जिससे लिंग निर्धारण होने के बाद बदला जा सके। कुछ लोग इस तरह के भ्रम फैला कर लोगों को गुमराह करते हैं तथा अपना उल्लू सीधा करते हैं। उन्होंने कहा कि बेटा होने की देने पर सजा का संभवत: यह पहला मामला है।
अज्ञानता के कारण अपना ही नुकसान करते हैं अभिभावक
सीएमओ डा. वंदना भाटिया का कहना है कि अभिभावक बेटा होने की दवा लेकर अनजाने में अपना ही नुकसान करते हैं। क्योंकि दवा के नाम पर कुछ लोग पुरुष हार्मोंस देते हैं। जिसमें सीईओड नामक दवा होती है। इससे यदि होने बच्चे को काफी परेशानी होती है। उसके अंग भंग हो सकते हैं। मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा बाल मृत्यु दर का भी यह एक बड़ा कारण है। इसलिए लोग किसी के बहकावे में न आएं।
अब तक दर्ज हुए हैं 11 मामले
सीएमओ ने बताया कि अब तक बेटा होने की दवा देने एवं अल्ट्रासाउंड के माध्यम से लिंग की पहचान बताने के मामले में 11 एफआईआर दर्ज करवाई गई हैं। जो अब तक प्रदेश में सर्वाधिक हैं। विभाग का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।