संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा में त्रिभाषा सूत्र लागू करने को लंबे समय से प्रयासरत संस्कृत भारती के प्रयासों को कामयाबी मिली है।
प्रदेश में अगले सत्र से कक्षा नौवीं और 10वीं के छात्रों को तीसरी भाषा पढ़नी होगी, उसमें संस्कृत को शामिल कर लिया गया है। इस बारे में स्कूल शिक्षा विभाग ने शनिवार को पत्र भी जारी कर दिया है।
संस्कृत भारती हरियाणा (न्यास) के कैथल के जिला मंत्री जय भगवान शास्त्री ने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में त्रिभाषा सूत्र लागू करना प्रस्तावित था। इसके तहत हिंदी और अंग्रेजी के साथ एक स्थानीय भाषा को विषय के रूप में लागू करना था।
हरियाणा में संस्कृत प्रभावी भाषा के रूप में स्कूली शिक्षा में मौजूदगी दर्ज कराती रही है। ऐसे में हरियाणा में संस्कृत को त्रिभाषा सूत्र में लागू करवाने के लिए संस्कृत प्रेमियों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे थे इन प्रयासों को संस्कृत भारती ने सिरे चढ़वाने का कार्य किया है।
प्रदेश में तीसरी बड़ी भाषा के रूप में अपना प्रभाव कायम रखे इसके लिए संस्कृत भारती ने स्कूली पाठ्यक्रम में भाषा की उपयोगिता के लिए आंकड़े जुटाकर हरियाणा सरकार और विद्यालय प्रशासन से लगातार संपर्क साधे रखा। इस संबंध में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा निदेशक, एएसीएस आदि के साथ कई दौर की बैठकें की चलीं।
इसी का परिणाम निकला कि प्रदेश में न केवल त्रिभाषा सूत्र लागू हो पाया, वहीं पर संस्कृत को इसमें शामिल कर संस्कृत प्रेमियों की भावनाओं को उच्च स्थान दिलवाया। कहा कि त्रिभाषा सूत्र लागू होने से उच्च विद्यालयों में संस्कृत विषय के अध्यापकों की मांग बढ़ेगी।
इससे संस्कृत विषय में रोजगार के और अवसर बढ़ेंगे। त्रिभाषा सूत्र के प्रदेश में लागू होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के साथ शिक्षा विभाग के अधिकारियों का भी आभार जताया। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड और हिमाचल की द्वितीय राज्य भाषा संस्कृत है। अनेक प्रदेशों में संस्कृत अकादमी हैं और राजस्थान में अलग से संस्कृत निदेशालय है। संस्कृत भारती संगठन के विशेष प्रयास से भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के 30 से अधिक देशों में लाखों लोग संस्कृत पढ़ने के साथ-साथ व्यावहारिक रूप से बोल रहे है।
हजारों संस्कृत परिवार हैं जिनमें सभी सदस्य निरंतर संस्कृत में ही व्यवहार करते हैं । भारत में पांच संस्कृत गांव हैं और 10 से अधिक गांव में प्रयास चल रहा है जिसमें सभी लोग संस्कृत में व्यवहार करते है।