कैथल। शहर का रेलवे स्टेशन वर्ष 1890 में अंग्रेजों के जमाने में बना था। लेकिन विकास कार्यों की बात करें तो आज भी इसकी स्थिति बदहाल ही है। बीते तीन वर्षों में यहां से तीन एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन जरूर शुरू हुआ, मगर स्टेशन की हालत अब भी पैसेंजर स्तर से आगे नहीं बढ़ पाई है।
कैथल रेलवे स्टेशन पर पहले केवल पैसेंजर गाड़ियां ही चलती थीं। पिछले तीन सालों में तीन एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू हुई हैं, लेकिन स्टेशन की बुनियादी सुविधाएं जस की तस हैं। प्लेटफार्म छोटा और नीचा है, जिससे यात्रियों खासतौर पर बुजुर्गों को चढ़ने-उतरने में दिक्कत आती है। प्लेटफार्म नंबर-2 पर प्रतीक्षालय तक नहीं है।
अब 27 सितंबर से उदयपुर-चंडीगढ़ ट्रेन का संचालन शुरू हो रहा है, जिसमें लगभग 20 कोच होंगे। प्लेटफार्म की लंबाई पर्याप्त न होने से कई डिब्बे प्लेटफार्म से आगे या पीछे खड़े होंगे, जिससे यात्रियों को परेशानी होगी।
कई बार यात्रियों को अपने बुक किए गए कोच तक पहुंचने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।
रेलवे स्टेशन पर शौचालयों का निर्माण तो हुआ है, लेकिन पिछले छह महीनों से ये बंद पड़े हैं। आम जनता के लिए इन्हें अब तक खोला ही नहीं गया। वहीं रेलवे परिसर की सार्वजनिक जगहों पर गंदगी का आलम बना हुआ है। संवाद
यात्रियों की मांग : प्लेटफार्म की लंबाई बढ़ाने के साथ सुविधाएं भी सुधारें
रेल यात्री कल्याण समिति के चेयरमैन सतपाल गुप्ता ने बताया कि स्टेशन पर पांचवीं रेल लाइन बनाई जानी चाहिए, ताकि एक समय में पांच ट्रेनें खड़ी हो सकें। चार साल पहले भी स्टेशन पर कई कार्य करवाए गए थे, जिनमें पार्किंग, टिकट घर और स्टेशन मास्टर के केबिन का निर्माण शामिल है। स्टेशन यार्ड में इंटरलॉकिंग सिस्टम को कंप्यूटरीकृत किया गया था।हालांकि प्लेटफार्म का विस्तार तब भी नहीं हुआ। इसका नतीजा यह है कि यहां से गुजरने वाली दौलतपुर-साबरमती एक्सप्रेस का इंजन और दो से तीन बोगियां प्लेटफार्म के आगे खड़ी हो जाती हैं। प्लेटफार्म की लंबाई बढ़ने के बाद ही यह समस्या दूर होगी। साथ ही प्लेटफार्म नंबर-2 पर प्रतीक्षालय के निर्माण की भी मांग है।
रेलवे का इतिहास
कैथल रेलवे स्टेशन का निर्माण 1890 में ब्रिटिश काल में व्यापारिक उद्देश्यों से किया गया था। शुरू में यहां केवल मालगाड़ियां चलती थीं। बाद में 1913 के आसपास यात्री ट्रेनों का संचालन भी शुरू हुआ। आज़ादी के बाद पहले नरवाना से अंबाला और फिर कुरुक्षेत्र से जींद तक रेल सेवा जोड़ी गई। इसके बाद दिल्ली-कुरुक्षेत्र के बीच नई रेल सेवा शुरू हुई, जिससे लोगों को राजधानी तक पहुंचने में सुविधा हुई।
32 कैथल रेलवे स्टेशन पर अंग्रेजों के जमाने की बना पुराना भवन संवाद