पूंडरी। पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि नवरात्रों के दौरान देवी की पूजा कर महामाया का गुणगान किया जाता है। मातृ शक्ति का आशीर्वाद मनुष्य की चेतना को पुष्पित और पल्लवित करता है, जिससे विवेक जागृत होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य आदिकाल से ही शक्ति की उपासना करता रहा है। यह शक्ति दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती और अन्य रूपों में पूरे विश्व में व्याप्त है।
पूजा और व्रत की परंपरा ः इन दिनों घर-घर में नवदुर्गा का पाठ होता है और लोग व्रत रखते हैं। उन्होंने बताया कि प्रथम नवरात्र के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर मां की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर ध्यान करना चाहिए। उन्होंने बताया कि गणपति
पूजन के बाद दीपक प्रज्वलित करें और नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अष्टमी और नवमी को नौ कन्याओं का पूजन और उनका भोग लगाने की
परंपरा है।
पूजा सामग्री ः मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, लाल चुनरी, अशोक/आम की पत्तियाँ, चावल, दुर्गा सप्तशती की पुस्तक, लाल कलावा, गंगा जल, चंदन, नारियल, कपूर, जौ के बीज, मिट्टी का बर्तन, गुलाल, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची आदि। संवाद