संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। इस साल होलाष्टक 17 मार्च से शुरू हो रहे है, जो 24 मार्च तक चलेंगे। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तक रहते है। यानी होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक का समापन होता है। अष्टमी तिथि से शुरू होने कारण भी इसे होलाष्टक कहा जाता है।
पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 16 मार्च की रात से होगा। समापन 17 मार्च को सुबह होगा। 25 मार्च को रंग वाली होली(धुलंडी) मनाई जाएगी।
होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। उन्होंने बताया कि इन आठ दिनों में भले ही शुभ कार्य नहीं किए जाते, लेकिन देवी-देवताओं की अराधना के लिए ये दिन बहुत ही श्रेष्ठ माने जाते हैं।
शांडिल्य ने बताया कि हिंदू धर्म में होली के पर्व का विशेष महत्व है। साल की शुरुआत होते ही पहला बड़ा त्योहार होली ही होता है। उन्होंने कहा कि होलाष्टक शब्द होली और अष्टक से से मिलकर बना है। इसका अर्थ है होली के आठ दिन। देश भर में होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को किया जाता है, पूर्णिमा से आठ दिन पहले से होलाष्टक लग जाता है। इन आठ दिनों के मध्य विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, मकान, जमीन, वाहन क्रय और विक्रय आदि निषेध माने गए हैं। होलाष्टक के आठ दिनों के बीच विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, मकान-वाहन की खरीदारी आदि किसी भी शुभ कार्य की मनाही होती है।
एक तरफ होलाष्टक में 16 संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। होलाष्टक के दौरान दान-पुण्य करने का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान मनुष्य को अधिक से अधिक भगवत भजन और वैदिक अनुष्ठान करने चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से हर तरह के रोग से छुटकारा मिलता है और सेहत अच्छी रहती है।