संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। क्योड़क गांव में राहत पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जा रही पुलिया अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। पिछले एक महीने से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे गांव का मुख्य मार्ग एवं अन्य गांवों को जोड़ने वाला मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। इस कारण ग्रामीणों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तमाम लोग घायल हो चुके हैं।
विभागीय अनदेखी के चलते गुस्साए ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और पुलिया को बनाने की मांग की है। ग्रामीण धनीराम शर्मा, वंश, गोपाल शर्मा, रामचन्द्र, राजेन्द्र शर्मा, राजकुमार, गयूर खान, रोशन लाल का कहना है कि इस पुलिया का निर्माण कार्य एक महीने पहले शुरू किया गया था, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के चलते यह अब तक अधूरा पड़ा है।
सड़क को पूरी तरह खोद दिया गया है, लेकिन निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। इस वजह से गांव वालों को वैकल्पिक मार्गों से होकर गुजरना पड़ रहा है, जो बेहद संकरे और असुरक्षित हैं। बारिश के कारण कीचड़ और गड्ढों की समस्या और बढ़ गई है, जिससे कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार पुलिया के निर्माण में पुराना लेंटर का सामान का प्रयोग कर रहा है। इससे पुलिया के गिरने का खतरा है। गांव निवासी अनिल कौशिक, राम सिंह ने बताया हर दिन कोई न कोई इस अधूरी पुलिया के कारण गिरकर घायल हो जाता है। कुछ लोगों की हड्डियां तक टूट गई हैं। इसी तरह एक अन्य ग्रामीण श्यामलाल ने कहा गांव के बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह रास्ता जानलेवा बन गया है। रात के अंधेरे में यहां से निकलना बेहद जोखिम भरा हो गया है। बीते दिन ही एक बुजुर्ग महिला को अस्पताल पहुंचाया गया है। एक छात्र भी चोटिल हो चुकी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। ठेकेदार को कई बार निर्माण कार्य जल्द पूरा करने के लिए कहा गया, लेकिन वह लापरवाह बना हुआ है। मजबूर होकर ग्रामीणों ने अब पुलिया के निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग को नारेबाजी करने को मजबूर हैं। चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया तो वे सडक़ पर जाम लगाने को मजबूर होंगे।
सरपंच जसबीर ने कहा कि यह कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग कर रहा है। वे पिछले 10 दिनों से विभाग के चक्कर काट रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। सरपंच ने बताया कि वे अपनी समस्या को लेकर एक बार फिर पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों से मिलेंगे।