गुहला चीका। आदर्श नाटक क्लब चीका की ओर से श्री भवानी मंदिर के प्रांगण में आयोजित रामलीला के पांचवें दिन वृंदावन से आए कलाकारों ने परशुराम लक्ष्मण संवाद तथा राम सीता विवाह के प्रसंग का मंचन कर दर्शकों का मन मोह लिया। इस दौरान दर्शकों ने संवाद की सुंदर प्रस्तुति पर जमकर तालियां बजाईं।
कलाकारों द्वारा मंचित लीला के अनुसार सीता स्वयंवर में शिव धनुष टूटने की आवाज पर महेंद्रगिरी पर्वत पर समाधि में लीन भगवान परशुराम जी जनकपुर में प्रकट हो जाते हैं। वे शिव जी का टूटा धनुष देखकर भगवान परशुराम क्रोधित हो गए और बोले जिसने शिवजी का धनुष तोड़ा है। वह सहस्त्रबाहु के समान मेरा शत्रु है। इसलिए वह समाज से अलग हो जाए। वरना सभी राजा मारे जाएंगे। परशुराम जी के बचन सुनकर लक्ष्मण जी मुस्कुरा कर कर बोले कि बहु धनुहि तोड़ी लरिकाई, कबहु न असी ऋषि किन्ह गोसाई। बचपन में हमने बहुत से धनुष तोडे़ है। तब आप इतना क्रोधित नहीं हुए। आखिर इस धनुष पर इतनी ममता क्यों है। इसके बाद श्री राम खड़े हुए। श्री राम ने कहा कि हे भृगुकुल शिरोमणि आप बालक पर क्रोध न करें। मैं आपका अपराधी हूं। मुझे जो भी दंड देना हो वह दीजिए। आप हर तरह हमसे बड़े है। परशु सहित बड़ नाम तुम्हारा, आपका नाम भी हमारे नाम से बड़ा परशुराम है। जबकि हमारा नाम छोटा सा राम है। इस पर परशुराम जी संशय दूर करने के लिए अपना धनुष देते हुए कहते है कि राम रमापति करधनु लेहु, खैचहु मोर मिटै संदेहू। श्री राम परशुराम से धनुष लेकर उसपर पर प्रत्यंचा चढ़ा देते है। तब परशुराम को विश्वास हो जाता है कि भगवान विष्णु राम रूप में पृथ्वी पर जन्म ले चुके हैं। वे राम लक्ष्मण से अपने गलतियों की क्षमा मांगने के बाद चले जाते है। इसके बाद धूम धाम से श्रीराम सीता सहित चारों भाइयों का विवाह संपन्न हुआ। इस मौके पर मिथिला के सखियों द्वारा राम गाली सहित हल्दी, परछन आदि विवाह कार्य का मंचन देखकर महिलाएं काफी प्रसन्न दिखी। इस मौके पर एसडी सभा के प्रधान राजीव शर्मा, आदर्श नाटक क्लब के प्रधान बलवीर सैनी, दीपक मिगलानी, गुरबख्श सीड़ा, कुलदीप माजरा, रविदत्त मौजूद रहे।