हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष मांगे राम खुरानिया ने कहा कि सरकार द्वारा हरियाणा में मिलर्स से चावल की मिलिंग के दौरान लिए जाने वाले होल्डिंग चार्जिज छोड़े जाने की जानकारी मिली है।
लेकिन केवल होल्डिंग चार्जिज में छूट से कोई ज्यादा फर्क नहीं पडने वाला। राइस इंडस्ट्री इस समय बर्बादी के कगार पर है। सरकार द्वारा बिजली बिलों के एडवांस जमा करवाने, वैट टेक्स, मार्केट फीस सहित तमाम तरह के टैक्सों के कारण चावल उद्योग इस समय बंद होने जा रहा है।
मिलिंग की दरों मिलर्स को 50 साल से भी पुरानी दरों के हिसाब से भुगतान हो रहा है। जबकि उनसे होने वाली सभी प्रकार की वसूली की दरों में कई गुणा इजाफा हो चुका है।
ऐसे में मिलर्स के लिए मिलों को चलाना मुश्किल हो रहा है। पंजाब सरकार की तर्ज पर सरकार ने अब होल्डिंग चार्ज में छूट का ऐलान किया गया है। सरकार को चाहिए कि मिलर्स पर लगाए गए अनावश्यक टैक्स में छूट प्रदान की जाए। जिस तरह से सरकार द्वारा चीनी उद्योग को स्पैशल पैकेज दिया गया है, उसी तरह से मिलर्स को भी विशेष पैकेज दिया जाए।
मिलर्स एसोसिएशन के ही अश्विनी शोरेवाला ने कहा कि मिलर्स लंबे समय से अपनी समस्याओं के लिए सरकार से मांग करते आ रहे हैं। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। जिसका असर चावल के उत्पादन पर भी पड़ रहा है। किसान अब मिलिंग लायक मोटे धान की बजाए बारीकि धान का ज्यादा उत्पादन करने लगे हैं। यदि यही हाल रहा तो किसान मोटे चावल का उत्पादन पूरी तरह से बंद कर देंगे।