संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। गर्मियों के इस भीषण मौसम में जहां इंसानों को जल संकट झेलना पड़ रहा है, वहीं पशुधन भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। कलायत क्षेत्र की सिरसा ब्रांच नहर में मांग के अनुरूप पानी नहीं पहुंचने से नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो गई है।
स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि गांवों और कस्बों के पारंपरिक जल स्रोत तालाब और जोहड़ या तो पूरी तरह सूख चुके हैं या उनमें नाममात्र का पानी बचा है। इससे पशुओं के लिए पीने के पानी की भारी किल्लत खड़ी हो गई है।
पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ीं ः पेयजल संकट से जूझ रहे पशुपालक अब दूर-दराज के हैंडपंपों और अन्य वैकल्पिक संसाधनों के सहारे अपने पशुओं की प्यास बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन बढ़ती गर्मी और पशुओं की संख्या अधिक होने के चलते सीमित संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है।
नगर पालिका की बैठक में उठी तालाबों की दुर्दशा की आवाज ः कलायत में पेयजल संकट को लेकर नगर पालिका पार्षदों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें वार्ड-6 के पार्षद प्रदीप राणा ने डोबी व अन्य सूखे तालाबों में पानी पहुंचाने की मांग प्रमुखता से उठाई। पार्षदों ने सिंचाई विभाग से हस्तक्षेप की मांग की और बताया कि कई तालाबों की तलहटी दरारों से फट चुकी है, जबकि कुछ तालाब गाद की वजह से जल भंडारण क्षमता खो चुके हैं।बैठक में यह निर्णय लिया गया कि तालाबों की सफाई और उनमें सिंचाई विभाग से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने की मांग को प्राथमिकता दी जाएगी। पार्षदों ने पूर्व राज्य मंत्री कमलेश ढांडा को भी तिरंगा यात्रा के दौरान इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया।
वर्तमान में पानी की उपलब्धता सीमित है, लेकिन विभाग समस्या को लेकर गंभीर है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जल घरों और तालाबों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रणनीति बनाई जा रही है, जिससे समाधान जल्द निकलेगा। -अखिल कौशिक, उपमंडल अभियंता, सिंचाई विभाग