गुरमीत सीड़ा गुहला-चीका। मानसून के हर सीजन की तरह इस बार भी घग्गर नदी में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। वर्ष 2023 में टटियाना क्षेत्र में आई बाढ़ से हजारों हेक्टेयर फसल तबाह हो गई थी, मगर इसके बावजूद स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है।
सौंगलपुर और सींह गांवों के पास मारकंडा और घग्गर नदी का संगम होता है, जिससे बाढ़ की संभावना और बढ़ जाती है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस बार घग्गर में पानी आ चुका है, लेकिन सिंचाई विभाग ने न तो तटबंधों की मरम्मत करवाई और न ही नदी की सफाई करवाई। यदि भविष्य में बाढ़ के कारण नुकसान होता है, तो अधिकारी वही पुरानी दलील देंगे कि तटबंधों में चूहों के बिल बनने से टूट-फूट हुई।
भाकियू चढूनी के जिला आईटी सेल प्रभारी जरनैल सिंह जैली ने कहा कि सभी को पता है कि बारिश के दौरान घग्गर नदी में बाढ़ की संभावना बनी रहती है, फिर भी समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। संवाद
पानी बढ़ना शुरू, विभाग की अनदेखी ः लखविंदर सिंह
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के युवा जिला महासचिव लखविंदर सिंह उर्फ किंद्र ने बताया कि घग्गर नदी की सफाई और तटबंधों की मजबूती के लिए हर साल बजट आता है। मानसून से पहले विभाग को निरीक्षण कर मरम्मत कार्य पूरा कर लेना चाहिए, लेकिन इस बार अब तक ऐसा कुछ भी होता नजर नहीं आ रहा, जबकि नदी में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
जलस्तर बढ़ने पर टूट जाते हैं कमजोर तटबंध
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष चमकौर सिंह बनेड़ा ने कहा कि जलस्तर बढ़ने पर कमजोर तटबंध टूट जाते हैं, जिससे फसलें नष्ट हो जाती हैं और हालात बेकाबू हो जाते हैं। विभाग बाद में केवल हाथ मलता रह जाता है। सौंगलपुर, बौपुर, भूसलां, डंडौता, मैंगड़ा, मझेड़ी, सींह, टटियाना, सदरहेड़ी, सरौला, दाबा, चाबा, खुशहाल माजरा, लालपुर, हेमू माजरा और दबना खेड़ी से लेकर पंजाब सीमा के गांव भाटिया तक दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है।
हर समय बाढ़ का भय
भाकियू चढूनी के जिला उपाध्यक्ष केवल सिंह (सदरहेड़ी) ने कहा कि प्रशासन बाढ़ नियंत्रण के लिए कमेटियां बनाता है और कंट्रोल रूम भी लेकिन अगर यही गंभीरता तटबंधों की मरम्मत और सफाई पर दिखाई जाए, तो बाढ़ की स्थिति से बचा जा सकता है।