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Kaithal News: नौ गांव में बाल विवाह का एक साल में कोई केस नहीं

Thu, 21 Aug 2025 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिले की नौ ग्राम पंचायतों ने बाल विवाह रोकने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया है। खास बात यह है कि पिछले एक साल से इन गांवों में बाल विवाह का कोई भी मामला सामने नहीं आया। अब सामूहिक निर्णय के तहत ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कर बाल विवाह को जघन्य अपराध मानते हुए इसे सामाजिक बहिष्कार के दायरे में लाने का एलान किया गया।

जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी रितु लाठर की अनुशंसा और डीसी प्रीति के प्रोत्साहन पर हुई ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया गया। इसके बाद सभी ने एकमत से प्रस्ताव को स्वीकार किया। गांवों के अधिकतर सरपंचों का कहना है कि बाल विवाह एक जघन्य अपराध है। इस अपराध को रोकने के उद्देश्य से ही एकमत से यह फैसला लिया गया है।
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अभिशाप है बाल विवाह

बाल विवाह एक अभिशाप है। यह घोर अपराध की श्रेणी में आता है। इसका समाज पर बहुत बुरा असर पड़ता है और यह गांव पर धब्बे जैसा है। हमने ग्राम सभा में तय किया कि ऐसा धब्बा हमारे गांव पर न लगे। इसी वजह से डीसी के आदेशों पर हुई बैठक में हमने सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया। मैंने ग्रामीणों को समझाया कि कई बार लोग गरीबी या मजबूरी के चलते बेटियों का जल्दी विवाह कर देते हैं, लेकिन यह सोच गलत है। बेटी को तब ही विदा करना चाहिए जब वह समझदार और सक्षम हो जाए। -कुसुम लता, सरपंच कौल

नासमझ होती है नाबालिग

नाबालिग लड़की नासमझ होती है। कई बार माता-पिता किसी कारणवश बेटियों का विवाह 18 साल से पहले करने का सोच लेते हैं, जबकि उन्हें पता नहीं होता कि यह कानूनन अपराध है। नाबालिग बेटी न तो घरेलू जिम्मेदारियां समझ पाती है और न ही शारीरिक रूप से विवाह के लिए तैयार होती है। ऐसी स्थिति में कई बार शादी के बाद उसे प्रताड़ना झेलनी पड़ती है, तलाक तक हो जाता है और फिर दूसरी जगह विवाह की नौबत आ जाती है। इससे बेटी की पूरी जिंदगी प्रभावित होती है। मैंने यही बातें ग्रामीणों को समझाईं। -जसबीर सिंह, सरपंच क्योड़क

प्रशासन से मिला था संदेश

जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश मिला कि बाल विवाह पर सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। मैंने ग्रामीणों से कहा कि बाल विवाह न केवल बेटी की पढ़ाई रोक देता है बल्कि उसका जीवन भी बर्बाद कर देता है। 18 साल से कम उम्र की बेटियों को न तो सही समझ होती है और न ही वे जीवन के निर्णय लेने योग्य होती हैं। हमने एकमत से तय किया कि हमारे गांव में अब कोई बाल विवाह नहीं होगा और जो करेगा उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
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-जंगशेर, सरपंच ढांड।

ये हैं गांव

सिसला, जाखौली कमान, सेगा, शेरगढ़, क्योडक, नरवल, ढांड, कौल और बाकल गांव की पंचायतों ने यह सामाजिक निर्णय लिया। खास बात यह है कि इन नौ गांवों में इस साल अप्रैल से अब तक एक भी केस सामने नहीं आया है।
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