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Kaithal News: विवि के अस्थायी परिसर में सुविधाएं नहीं, नाराज छात्रों का प्रदर्शन

Sat, 21 Sep 2024 06:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। प्रदेश के पहले संस्कृत विश्वविद्यालय महर्षि वाल्मीकि विश्वविद्यालय के टीक गांव स्थित अस्थायी परिसर में शुक्रवार को विद्यार्थियों ने सुविधाएं न होने का आरोप लगाकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।

विवि परिसर के मुख्य गेट पर विवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। नाराज विद्यार्थियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह विवि परिसर विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी मुसीबत बना है। आरोप लगाया कि यहां आए दिन किसी न किसी समस्या का सामना करना पड़ता है, लेकिन प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।
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खेल, पानी और विषय से जुड़ी समस्याओं का लगा अंबार ः प्रिया शर्मा शास्त्री प्रथम वर्ष (व्याकरण), भावना शास्त्री प्रथम वर्ष (वेद), शिवानी शर्मा प्रथम वर्ष (वेद), सुमन प्रथम वर्ष (व्याकरण), शीतल प्रथम वर्ष, खुशबू प्रथम वर्ष शास्त्री व्याकरण, जन्नत शास्त्री प्रथम वर्ष, विक्रम, विनय, सूर्यांश, रोहन, सचिन, विशाल, सत्यनारायण, सुमित कुमार आचार्य (योगा), निखिल शास्त्री (धर्मशास्त्र), अंकित शास्त्री (ज्योतिष), विष्णु शास्त्री व्याकरण आदि विद्यार्थियों ने खेल की सुविधाओं की कमी, पीने के पानी की समस्या और पढ़ाई के लिए आवश्यक विषयों में देरी और अव्यवस्थाओं को लेकर विवि प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला।

नाराज छात्रों का कहना है कि जब से यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई है, समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें हल करने में असमर्थ रहा है। विद्यार्थियों का कहना है कि महर्षि वाल्मीकि विवि की घोषणा 2015 में हुई, लेकिन अब नौ साल बीत जाने के बाद भी इस विवि के भवन तक का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। विद्यार्थियों ने कहा कि यहां के अध्यापक शुरुआत में जानकारी देते नहीं और बाद में गुमराह करते हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विषय को 24 क्रेडिट में नहीं पढ़ाया जा रहा। जबकि शुरुआत ने ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। बताया कि पास हुए विद्यार्थियों को अभी तक डीएमसी व डिग्री भी नहीं मिली है। तृतीय वर्ष में पढ़ रहे विद्यार्थियों ने बताया कि अब तक प्रथम वर्ष की डीएमसी भी नहीं मिली है।
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विषयों को लेकर ही विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया है। विद्यार्थियों की दूसरे विषय शुरू करने की मांग है। परंतु अभी नियमों के अनुसार संस्कृत विषय ही संचालित की जा रही है। यदि आचार संहिता के बाद सरकार अनुमति देती है तो दूसरे विषय को शुरू किया जा सकता है। अभी तक दूसरे विषयों को लेकर कोई अनुमति नहीं मिली है।

- रमेश चंद्र भारद्वाज, वीसी, महर्षि वाल्मीकि विश्वविद्यालय, मुंदड़ी।
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