संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। वर्ष 2024 का मंगलवार को अंतिम दिन है। इस साल महिलाओं ने भी विभिन्न क्षेत्रों में काम कर अपने अपने जिले का नाम चमकाया है। इसके तहत सिंह गांव निवासी सुरिंद्र कौर और बिरथे बाहरी गांव निवासी रचना जल संरक्षण को लेकर कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही कलायत के कलासर गांव पूजा निवासी जैविक खेती कर रही हैं।
पूजा को 2023 में हिसार एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय में आयोजित हुए राज्य स्तरीय कार्यक्रम में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से पुरस्कार भी मिल चुका है।
कलासर की प्रगतिशील किसान पूजा ने बताया कि उसने वर्ष 2019 में खेती की शुरूआत की थी। इस दौरान उसने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर एक एकड़ में नेट हाउस लगा खीरे की खेती शुरू की। अब खीरे से 12 लाख रुपये सालाना कमाई कर रही है। वहीं, गांव की 10 महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। पूजा ने बताया कि घर की चार
एकड़ जमीन है, तीन एकड़ में नेट हाउस व दूसरे में अन्य सब्जियों की फसल लगाई हुई है।
पूजा ने बताया कि वह वर्ष 2017 में कैथल के कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ी थी। कृषि केंद्र ने करनाल के घरौंडा में प्रदर्शनी लगाई थी। उसमें जाने का मौका मिला। वहां खीरे की खेती के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद कैथल के कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर पूजा ने एक एकड़ में नेट हाउस लगा खीरे की खेती शुरू की।
पूजा ने बताया खेती के साथ वह पशुपालन भी कर रही है। चार देसी गायें व तीन भैंस रखी हुई हैं। रोजाना 15 से 20 लीटर दूध बिकता है। पशुपालन का मुख्य उद्देश्य घर पर गोबर से केंचुआ खाद तैयार कर कीटनाशक खेती छोड़ जैविक खेती को अपनाना है। पूजा ने बताया कि उसके नेट हाउस से प्रेरणा लेकर आसपास के गांवों के 20 किसानों ने भी जैविक खेती शुरू की है।
वहीं, जिले में महिलाएं भू-जल सहेली बनकर भी लोगों को जल संरक्षण का संदेश दे रही हैं। इसमें सिंह निवासी सुरिंद्र कौर और बिरथे बाहरी निवासी रचना जल संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक कर रही है।
बिरथे बाहरी निवासी रचना ने बताया कि उसने करीब एक साल पहले ही भू-जल सहेली बनकर लोगों को जल संरक्षण को लेकर जागरूक करने की शुरुआत की। इसके तहत वह अब तक एक हजार से अधिक लोगों को जागरूक कर चुकी हंै। उन्होंने बताया कि वह प्रति माह में दो बैठकें कर गांव सहित आसपास के क्षेत्र की महिलाओं को जागरूक करती हैं। इसमें बताया जाता है पानी का प्रयोग जरूरत के अनुसार ही किया जाए। इसके साथ ही पानी को व्यर्थ भी न बहाया जाए।
वहीं, सिंह निवासी सुरिंद्र कौर ने बताया कि वह गांव में आशा वर्कर है और पिछले डेढ़ साल से जल संरक्षण के तहत जागरूक कर रही है। उन्हें सिंचाई विभाग की ओर से जल संरक्षण पर बेस्ट भू-जल सहेली का अवार्ड भी दिया गया है। कहा कि वह अपने खंड स्तर पर भी महिलाओं सहित अन्य लोगों को जल संरक्षण के लिए लगातार जागरूक कर रही हंै।