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Kaithal News: पाक सैनिकों की मदद से आतंकियों ने की थी घुसपैठ

Thu, 08 May 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कमल बहल
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कैथल। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के चलते देशभर में बुधवार को मॉक ड्रिल भी की गई है। वहीं, कारगिल युद्ध में शामिल रहे कैथल के पाई गांव निवासी फौजी रणधीर सिंह ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को सराहनीय कदम बताया।

उन्होंने कहा कि पहलगाम में आतंकी हमले के दौरान आतंकियों ने धर्म पूछकर गोलियां चलाई और महिलाओं के सुहाग को छीना था, यह निंदनीय है। पहले भी ऐसा वे करते रहे हैं।
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फौजी रणधीर सिंह ने बताया कि वर्ष 1999 में हुआ कारगिल युद्ध भी ऐसी ही स्थितियों का परिणाम था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी सैनिकों की मदद से उग्रवादियों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर रणनीतिक क्षेत्रों पर कब्जा जमा लिया था। मई की शुरुआत में भारत ने उनका पता लगा लिया, जिसके परिणामस्वरूप युद्ध शुरू हुआ। इससे पहले भारत के साथ हुए समझौते को पाकिस्तान ने तोड़ा था।

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में स्थित बॉर्डर पर सर्दियों के सीजन में बर्फ अधिक पड़ती है। उस दौरान दोनों सेना के सैनिक पहाड़ों से नीचे आ जाते थे। यह एक समझौते के तहत हुआ था, लेकिन उस समय पाकिस्तान के सैनिकों ने भारतीय सेना रेकी की थी। उस समय पाकिस्तान की ओर से ही हमला किया था। फौजी रणधीर सिंह ने बताया कि टीम को सूचना मिली थी कि उग्रवादियों भारतीय सीमा के अंदर प्रवेश कर चुके है। इसके बाद भारतीय सेना व उग्रवादियों के बीच फायरिंग हुई। उन्होंने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। इस कारगिल युद्ध में दुश्मनों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी टांग गंवा दी थी।

हवलदार के पद पर तैनात थे ः 59 वर्षीय फौजी रणधीर सिंह ने बताया कि 25 मई 1988 में भारतीय सेना में हवलदार के पद पर तैनात हुए थे। जिनकी पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर के अखनूर में हुई थी। इसके बाद उन्हें 1999 में कारगिल युद्ध में भेजा गया। फौजी रणधीर सिंह ने बताया कि उनकी रिटायरमेंट 31 मई 2012 को हुई थी। इसके बाद वह गांव पाई में सादगी का जीवन रहे हैं। संवाद
ड्यूटी के दौरान बलिदान हो गए थे तीन दोस्त

रणधीर सिंह ने बताया कि वर्ष 1995 में ग्लेशियर में ड्यूटी के दौरान रात के समय पांच जवान गश्त पर थे। कश्मीर में बर्फीली हवाओं में एक-एक कदम चलना भारी था। अचानक बर्फ का पहाड़ दरक गया और उसकी आंखों के सामने तीन साथी बर्फीले तूफान में दब गए। तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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बलिदान होने वाले जवानों में भिवानी निवासी राजपाल, हिमाचल निवासी प्रेम और राजस्थान निवासी महेंद्र सिंह थे। वह और यूपी निवासी राजेश बाल-बाल बच गए थे। तीनों साथी बलिदानियों के शव भी करीब छह महीने के बाद मिले थे।
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