संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सर्दी के मौसम में ठंड से बचाव के लिए मोजे, दस्ताने और ऊनी कपड़ों का लंबे समय तक उपयोग अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। नागरिक अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में फंगल इंफेक्शन, स्कैबीज और एलर्जी के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार त्वचा पर नमी बने रहना और साफ-सफाई में लापरवाही संक्रमण फैलने की मुख्य वजह है।
त्वचा रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी गोयल ने बताया कि ओपीडी में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें स्टेरॉयड के गलत इस्तेमाल और हेपेटाइटिस-सी से ग्रसित मरीजों में फंगल इंफेक्शन के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। उन्होंने लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लेने और अपने मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सलाह दी।
डॉ. गोयल के अनुसार, ठंड में लगातार मोजे और दस्ताने पहनने से हाथ-पैरों में नमी बनी रहती है, जिससे उंगलियों के बीच फंगल इंफेक्शन हो जाता है। कई मामलों में उंगलियों में घाव तक बन रहे हैं। इसके अलावा स्कैबीज और त्वचा एलर्जी के मरीज भी बढ़े हैं। कुछ लोगों को ऊनी कपड़ों से एलर्जी हो रही है, खासकर जब वे ऊनी कपड़े सीधे त्वचा पर पहनते हैं। ऊन के रेशों से त्वचा में घर्षण होता है, जिससे लाल दाने और तेज खुजली की समस्या हो जाती है।
अंडरगारमेंट्स न बदलना भी संक्रमण का कारण
डॉ. गोयल ने बताया कि ठंड के मौसम में रोज न नहाना और अंडरगारमेंट्स न बदलना भी त्वचा संक्रमण का बड़ा कारण है। गंदगी से कीटाणु पनपते हैं, जो त्वचा रोगों को जन्म देते हैं। उन्होंने हीटर से लंबे समय तक हाथ-पैर सेंकने, बहुत गर्म पानी से नहाने और कम पानी पीने से भी बचने की सलाह दी। इन आदतों से त्वचा की नमी खत्म हो जाती है और खुजली, लाल चकत्ते व स्क्रैच की समस्या बढ़ जाती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
मोजे और दस्ताने 48 घंटे में जरूर बदलें और अच्छी तरह धोएं।
रोज नहाएं और अंडरगारमेंट्स प्रतिदिन बदलें।
शरीर व हाथ-पैरों को हमेशा सूखा रखें।
हीटर चलाते समय खिड़की थोड़ी खोलें, कमरे में पानी भरी बाल्टी रखें।
रोजाना करीब तीन लीटर पानी पिएं और हाथ-पैरों पर नारियल तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं।
बहुत गर्म पानी की बजाय गुनगुने पानी से स्नान करें।