संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। नगर के स्वर्गद्वार मंदिर में मंगलवार को आयोजित धार्मिक चर्चा में महंत अवध बिहारी दास ने श्रद्धालुओं को जीवन में शांति और समाधान का मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में अधिकतर लोग निरर्थक चिंताओं में उलझे रहते हैं, जबकि वास्तविक समाधान चिंता में नहीं, बल्कि चिंतन में छिपा है।
महंत ने कहा कि प्रभु का निरंतर सिमरन आत्मिक संतोष का मार्ग है। सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि ईश्वर की भक्ति में है। जब मन चिंतन करता है, तब आत्मा को शांति की अनुभूति होती है।
उन्होंने बताया कि सांसारिक मोह और इच्छाएं मन को भ्रमित करती हैं, लेकिन प्रभु का नाम स्मरण करने से चित्त स्थिर होता है। संकट के समय में भगवान का नाम व्यक्ति को साहस प्रदान करता है। जहां चिंता जीवन की ऊर्जा को समाप्त करती है, वहीं चिंतन व्यक्ति को ईश्वर से जोड़ता है।
सत्संग, सेवा और सिमरन—जीवन का मूल मंत्र
महंत अवध बिहारी दास ने कहा कि सत्संग, सेवा और सिमरन ही जीवन का सच्चा आधार होना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे रोज कुछ समय प्रभु के ध्यान को समर्पित करें। यही जीवन की सच्ची साधना है। जब व्यक्ति अपने हृदय में प्रभु को स्थान देता है, तब जीवन के सारे दुःख समाप्त हो जाते हैं।
महंत ने कहा िक ईश्वर का नाम वह दीपक है जो अंधकार में भी प्रकाश देता है।
उन्होंने उपस्थित जनों से आग्रह किया कि वे व्यर्थ की चिंता छोड़कर, भक्ति और चिंतन के मार्ग पर चलें।
इस अवसर पर पूर्ण सैनी, नीरज कंसल, भीषू चौधरी, भीम मेहता, कृष्ण वधवा, सुभाष रहेजा, चंद्रभान सैनी, जोगी सैनी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।