संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। क्योड़क गांव में प्रस्तावित लाला लाजपत राय पशुपालन विश्वविद्यालय (लुवास) का रीजनल सेंटर नौ साल बीत जाने के बावजूद आज भी ठंडे बस्ते में पड़ा है। बजट के अभाव ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अधर में लटका दिया है। हालत यह है कि विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी-बड़ी घास उग आई है और कई बार यहां नशेड़ी शराब व अन्य नशे का सेवन करते हुए भी देखे जाते हैं, जिससे सुरक्षा और सामाजिक माहौल पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लुवास की चहारदीवारी का निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन मुख्य भवन का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका। जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए पहले करीब आठ करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी, लेकिन लागत में बढ़ोतरी (कोस्ट न बढ़ने) के चलते निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया। अब दोबारा से नया एस्टीमेट बनाकर चीफ सेक्रेटरी को भेजा गया है, जिस पर करीब 37 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। गौरतलब है कि अक्तूबर 2016 में लाला लाजपत राय पशुपालन विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर को क्योड़क गांव में खोलने की घोषणा की गई थी। घोषणा के तुरंत बाद ग्राम पंचायत ने इसके लिए 10 एकड़ भूमि सरकार को सौंप दी थी। तभी से ग्रामीण इस सेंटर के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
रीजनल सेंटर के शुरू होने से न केवल कैथल, बल्कि कुरुक्षेत्र, अंबाला, जींद समेत आसपास के कई जिलों के पशुपालकों को बड़ी राहत मिलनी थी। पशुओं के इलाज, ऑपरेशन, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएं इसी केंद्र पर उपलब्ध होनी थीं। इससे पशुपालकों को हिसार और करनाल के रीजनल सेंटरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
फिलहाल सेंटर तैयार न होने के कारण पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसी पशु के गंभीर रूप से बीमार होने पर उसे सैकड़ों किलोमीटर दूर हिसार या करनाल ले जाना मजबूरी बन चुका है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।
पूर्व विधायक लीला राम गुर्जर ने बताया कि लाला लाजपत राय पशुपालन विश्वविद्यालय का कार्य फिलहाल रुका हुआ है। सेंटर के निर्माण और आवश्यक मशीनरी पर करीब 35 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही भवन का निर्माण कार्य दोबारा शुरू होगा। -लीला राम गुर्जर, पूर्व विधायक, कैथल
लोग बोले- उम्मीद है, पूरी नहीं हो रही
क्योड़क गांव के निवासी राजकुमार, जसबीर और ईश्वर सिंह ने बताया कि वे लंबे समय से इस केंद्र के शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं लेकिन वह पूरी नहीं हो रही। उनका कहना है कि यदि गांव में ही रीजनल सेंटर बनकर तैयार हो जाता है तो न केवल आसपास के गांवों को इसका लाभ मिलेगा, बल्कि जिले में पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।